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संसद में गोमूत्र पर टिप्पणी सनातन संस्कृति का अपमान: प्रेम पंडित

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भाजपा देव समाज प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक बोले- गौ माता आस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आयुर्वेदिक परंपरा का आधार

राजनीति से ऊपर उठकर संस्कृति के संरक्षण का किया आह्वान

शिमला। भारतीय जनता पार्टी के देव समाज प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रेम पंडित ने संसद में गोमूत्र को लेकर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे सनातन संस्कृति और हिंदू आस्था का अपमान बताया है। गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का अभिन्न अंग रही है।


प्रेम पंडित ने कहा कि सनातन परंपरा में जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र) का विशेष महत्व है। घरों की शुद्धि, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्यों में गोमूत्र के उपयोग की परंपरा सदियों पुरानी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में महर्षि चरक और सुश्रुत जैसे विद्वानों ने भी गोमूत्र और पंचगव्य के औषधीय गुणों का उल्लेख किया है।


उन्होंने कहा कि गाय केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। दूध और उससे बनने वाले उत्पादों के साथ-साथ गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खाद एवं प्राकृतिक कीटनाशक आज प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे किसानों को आय के नए अवसर मिल रहे हैं।


प्रेम पंडित ने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष द्वारा गोमूत्र की आलोचना करना सनातन संस्कृति, हिंदू धर्म की गरिमा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आघात है। उन्होंने इस तरह की टिप्पणियों की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।


उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करें, ताकि भविष्य में आस्था और परंपराओं का उपहास न बनाया जा सके।