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नियमित पद खाली, फिर भी आउटसोर्स भर्ती क्यों? हाईकोर्ट ने 1000 रोगी मित्रों की भर्ती पर लगाई रोक

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1535 स्टाफ नर्स के नियमित पद खाली होने पर कोर्ट ने सरकार की नीति पर उठाए सवाल, 15 हजार रुपये मानदेय पर भी जताई चिंता


शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स आधार पर प्रस्तावित 1000 रोगी मित्रों की भर्ती पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्स के बड़ी संख्या में नियमित पद रिक्त होने के बावजूद आउटसोर्स व्यवस्था के जरिए नया कैडर तैयार करने की सरकारी नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में 290 पदों को भरने के लिए जारी मांग पत्र पर भी रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश बाल कृष्ण की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया।


सरकार ने कहा-नीति पर हो रहा पुनर्विचार


सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार रोगी मित्र नीति पर पुनर्विचार कर रही है। सरकार की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया कि याचिका लंबित रहने तक प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।


सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए खंडपीठ ने अगले आदेश तक नई भर्ती और तैनाती पर रोक लगा दी।


1535 नियमित पद खाली होने पर कोर्ट ने पूछा सवाल


मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आया कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में स्टाफ नर्स के 1535 नियमित पद रिक्त हैं। इसी तथ्य को आधार बनाते हुए अदालत ने सरकार की नीति पर सवाल उठाया कि जब विभाग में नियमित पद पहले से खाली हैं, तो उन्हें नियमित भर्ती के जरिए भरने के बजाय आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से नया कैडर तैयार करने की आवश्यकता क्यों है।


अदालत की चिंता का मुख्य बिंदु यह रहा कि एक ओर नियमित पद रिक्त पड़े हैं, जबकि दूसरी ओर समान प्रकृति के कार्य के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता अपनाया जा रहा है।


स्टाफ नर्स जैसी योग्यता, लेकिन मानदेय सिर्फ 15 हजार


याचिका में उस योजना को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत स्टाफ नर्स के समान शैक्षणिक योग्यता रखने वाले 1000 लोगों को रोगी मित्र के रूप में आउटसोर्स आधार पर अस्पतालों में तैनात किया जाना था। योजना के तहत इन कर्मचारियों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय दिए जाने का प्रावधान था।


खंडपीठ ने इस व्यवस्था पर भी चिंता जताई। अदालत के समक्ष यह मुद्दा आया कि यदि आउटसोर्स कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों के समान या समान प्रकृति का काम लिया जाता है, तो उन्हें बेहद कम निश्चित मानदेय पर रखने की व्यवस्था युवाओं के हितों को प्रभावित कर सकती है।


आउटसोर्स एजेंसियों की भूमिका भी न्यायिक जांच के दायरे में
सुनवाई के दौरान आउटसोर्स एजेंसियों की कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों के न्यायिक परीक्षण का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने इस पृष्ठभूमि में नई आउटसोर्स भर्ती को लेकर सावधानी बरतना उचित समझा।


फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद 1000 रोगी मित्रों की भर्ती प्रक्रिया और 290 पदों को भरने के लिए जारी मांग पत्र पर आगे की कार्रवाई रुक गई है।


मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार की रोगी मित्र नीति पर पुनर्विचार और स्वास्थ्य विभाग में रिक्त नियमित पदों को भरने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।