बोले- ₹135.69 करोड़ सालाना बचाने के लिए हिमाचल के दीर्घकालिक जल अधिकारों से समझौता क्यों, मुख्यमंत्री जनता के सामने रखें पूरा ब्यौरा
शिमला। हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से परियोजना के वित्तीय प्रावधानों और हिमाचल के दीर्घकालिक हितों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने परियोजना पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को जल अधिकार, बिजली हिस्सेदारी, संभावित आय, सिंचाई और रोजगार से जुड़े सभी प्रावधान जनता के सामने रखने चाहिए।
बिंदल ने कहा कि भाजपा किशाऊ परियोजना और छह राज्यों के बीच हुए समझौते का स्वागत करती है, लेकिन मुख्यमंत्री को इसके वास्तविक वित्तीय प्रावधानों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने परियोजना का श्रेय केंद्र सरकार को देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ने 15 सितंबर को समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
₹15,624 करोड़ की परियोजना पर उठाए सवाल
बिंदल ने कहा कि किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़ है। उन्होंने दावा किया कि इसमें जल घटक की लागत ₹12,096 करोड़ और विद्युत घटक की लागत ₹3,528 करोड़ है। केंद्र सरकार ने जल घटक की करीब 90 प्रतिशत लागत वहन करने का प्रावधान किया है।
उन्होंने कहा कि पूर्व व्यवस्था के अनुसार हिमाचल प्रदेश को विद्युत घटक में करीब ₹1,764 करोड़ का निवेश करना पड़ता। बिंदल ने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं परियोजना से हिमाचल को करीब ₹1,200 करोड़ सालाना आय होने की बात कह रहे हैं, तो राज्य ने अपने हिस्से का निवेश करने के विकल्प पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार नए समझौते में हिमाचल के बिजली घटक से जुड़े वित्तीय बोझ को अन्य लाभार्थी राज्यों के साथ साझा करने पर सहमति बनी है और हिमाचल को परियोजना से 211 मेगावाट बिजली मिलने की बात राज्य सरकार ने कही है।
जल अधिकारों और भविष्य की जरूरतों पर मांगा जवाब
बिंदल ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि समझौते के तहत हिमाचल के जल हिस्से में क्या बदलाव हुआ है और इसका प्रदेश की भविष्य की पेयजल, सिंचाई, कृषि व बागवानी जरूरतों पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का मूल्यांकन केवल वर्तमान वित्तीय लाभ के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से सिरमौर के किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। बिंदल ने पूछा कि परियोजना से सिरमौर में कितने क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिल सकती है और स्थानीय किसानों के लिए भविष्य में क्या प्रावधान किए गए हैं।
रोजगार और स्थानीय कारोबार पर भी मांगा रोडमैप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजना से स्थानीय युवाओं, ठेकेदारों, परिवहन कारोबारियों और छोटे व्यवसायियों को रोजगार एवं कारोबार के अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि समझौते में स्थानीय युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण देने के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं।
बिंदल ने कहा कि सरकार को परियोजना की पूरी वित्तीय और कानूनी शर्तें सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि श्वेतपत्र में केंद्र और राज्यों का वित्तीय योगदान, हिमाचल के जल अधिकार, बिजली की हिस्सेदारी, संभावित राजस्व, सिंचाई क्षमता, रोजगार और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़ी जानकारी शामिल की जाए।
उन्होंने कहा कि भाजपा परियोजना के निर्माण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसका सवाल हिमाचल प्रदेश के दीर्घकालिक आर्थिक हितों और जल अधिकारों को लेकर है। बिंदल ने मुख्यमंत्री से इन सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक स्थिति प्रदेश की जनता के सामने रखने की मांग की।












