मुख्यमंत्री सुक्खू ने ऊर्जा विभाग को दिए निर्देश, डुग्गर परियोजना की शर्तों पर भी दोबारा बातचीत होगी
नेशन वायर ब्यूरो
शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए पूर्व में एसजेवीएन लिमिटेड को आवंटित की गई 382 मेगावाट सुन्नी, 210 मेगावाट लुहरी चरण-1 तथा 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजनाओं को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जलविद्युत हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के समृद्ध जल संसाधनों का अधिकतम लाभ यहां की जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के लोगों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रतिबद्ध है और प्राकृतिक संसाधनों से प्रदेश का उचित हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को NHPC Limited द्वारा विकसित की जा रही 500 मेगावाट डुग्गर जलविद्युत परियोजना की शर्तों और नियमों पर दोबारा बातचीत करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि एनएचपीसी ने परियोजना में बांध की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, ऐसे में राज्य सरकार संशोधित परियोजना के अनुरूप हिमाचल के हितों को सुरक्षित रखने और उचित लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने 422 मेगावाट किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस परियोजना से जुड़े पिछले आठ वर्षों के गतिरोध को समाप्त कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश सरकार को इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश नहीं करना होगा, जबकि हिमाचल को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली प्राप्त होगी। इससे राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, सचिव (ऊर्जा) राकेश कंवर, निदेशक ऊर्जा राकेश प्रजापति, एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।












