उद्योग मंत्री Harshwardhan Chauhan ने केंद्र से मांगी बेहतर रेल, लॉजिस्टिक और निर्यात सुविधाएं, राज्य के 17 जीआई उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर
शिमला। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री #Piyush_Goyal की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित व्यापार बोर्ड की बैठक में हिमाचल प्रदेश ने व्यापार, निर्यात संवर्धन और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। बैठक में हिमाचल का प्रतिनिधित्व उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर.डी. नज़ीम ने किया।
उद्योग मंत्री ने बैठक में राज्य में व्यापार को मजबूत करने, निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं को विस्तार से रखा। उन्होंने भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत पर्वतीय राज्यों के लिए न्यूनतम पात्रता सीमा 25 एकड़ किए जाने पर केंद्र सरकार का आभार जताया।
उन्होंने बताया कि राज्य में प्रस्तावित चार औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन अंतिम चरण में हैं, जिन्हें जल्द केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इनमें सोलन, नालागढ़, सिरमौर और ऊना के औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि हिमाचल का निर्यात वर्ष 2003-04 में करीब 500 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर वर्ष 2024-25 में 20,414 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राज्य की मजबूत औद्योगिक नीति और निर्यातोन्मुख रणनीति का परिणाम है।
बैठक में उन्होंने बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में विदेश व्यापार महानिदेशालय का उपकार्यालय स्थापित करने और ऊना के बल्क ड्रग पार्क में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) का उप परिसर खोलने की मांग भी रखी।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्यों में परिवहन और माल ढुलाई की अधिक लागत निर्यात में बड़ी बाधा है। इसको देखते हुए चंडीगढ़-बद्दी रेल परियोजना को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि उद्योगों की लागत कम हो और प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हिमाचल सहित पर्वतीय राज्यों की निर्यात आवश्यकताओं को समझने और उनके समाधान के लिए अलग से बैठकें आयोजित करने का भरोसा दिया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
केंद्रीय उद्योग मंत्री ने बताया कि हिमाचल के 17 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, जिनमें हाल ही में सात नए उत्पाद शामिल हुए हैं। वहीं मुख्यमंत्री की ‘एक जिला-तीन उत्पाद’ पहल के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है।












