2.56 लाख किसान कर रहे प्राकृतिक खेती, दूध उत्पादकों को 300 करोड़ का भुगतान; प्राकृतिक उत्पादों की मार्केटिंग के लिए बनेगा अलग विंग
शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। शनिवार को कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ाने और किसानों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की बेहतर बिक्री सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग में अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही ई-कॉमर्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन उत्पादों की मार्केटिंग की संभावनाएं भी तलाशने को कहा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 2,56,870 किसान 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। सरकार की नई नीतियों के कारण लगातार अधिक किसान इस मॉडल से जुड़ रहे हैं। जो किसान खेती छोड़ चुके थे, वे भी अब दोबारा खेती की ओर लौट रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू किया है। वर्तमान में प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं 80 रुपये, मक्की 50 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये, पांगी घाटी की जौ 80 रुपये और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जा रही है।
डेयरी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा दूध पर एमएसपी लागू किए जाने के बाद दूध उत्पादन और सहकारी डेयरी प्रणाली से जुड़ने वाले किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। गाय के दूध का एमएसपी 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का एमएसपी 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में सरकार दूध उत्पादकों को 300 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल क्षेत्र को प्राकृतिक खेती पंचायत घोषित करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। साथ ही बड़ा भंगाल की प्रसिद्ध राजमाह के लिए जीआई टैग प्राप्त करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने को कहा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा इस दिशा में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।












