कुफरी में वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के सम्मेलन में बोले कृषि एवं पशुपालन मंत्री, अक्टूबर से शुरू होगा ढगवार दुग्ध संयंत्र; एसीपीएस पुनर्जीवन पर बनेगी संयुक्त समिति
शिमला। कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि पशु चिकित्सकों की भूमिका केवल पशुओं के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि पशु अपनी पीड़ा स्वयं व्यक्त नहीं कर सकते, ऐसे में उनकी बीमारी की पहचान कर उपचार करना पशु चिकित्सकों की संवेदनशीलता, अनुभव और दक्षता की वास्तविक परीक्षा है।
रविवार को कुफरी में आयोजित हिमाचल प्रदेश वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के जनरल हाउस एवं सेमिनार को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि और पशुपालन को एकीकृत कर किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कांगड़ा के ढगवार में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र इस वर्ष अक्टूबर तक शुरू हो जाएगा। इसका संचालन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) करेगा, जिससे दुग्ध क्षेत्र को नई गति मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और नई चुनौतियों को देखते हुए पशु चिकित्सकों को वैज्ञानिक और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करनी होगी। विभिन्न मौसमों में पशुओं में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम, दवाइयों और टीकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश में निराश्रित पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए पशुधन गणना कर वास्तविक आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इसके आधार पर प्रभावी नीति तैयार की जाएगी। उन्होंने पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों और नव नियुक्त चिकित्सकों से इस दिशा में शोध और व्यवहारिक सुझाव देने का भी आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि सरकार युवाओं को पशुपालन से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चला रही है। प्राकृतिक खेती के तहत उत्पादित गेहूं, मक्की और हल्दी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जा रहा है। साथ ही पंजाब और हरियाणा की हैचरियों के सहयोग से पोल्ट्री और मत्स्य पालन गतिविधियों का भी विस्तार किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए तैयार की गई ‘पहल’ योजना केंद्र सरकार को भेजी गई है। इसके अलावा एसीपीएस (ACPS) के पुनर्जीवन के लिए विभाग और एसोसिएशन की संयुक्त समिति गठित कर जल्द बैठक आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. संजीव कुमार धीमान ने कहा कि प्रदेश में करीब 43 लाख पशुधन है और विभाग पशुओं के उपचार के साथ-साथ पशुपालकों की समस्याओं के समाधान के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 2.50 लाख लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है और ढगवार दुग्ध संयंत्र शुरू होने के बाद यह क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
हिमाचल प्रदेश वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं उपनिदेशक डॉ. नीरज मोहन ने कहा कि पशु चिकित्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहली बार दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर पशुपालकों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में पशु चिकित्सकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. चंद्र कुमार ने एसोसिएशन के निवर्तमान पदाधिकारियों को सम्मानित किया। वहीं डॉ. ऋचा कौशल ने ‘पशु चिकित्सा विज्ञान में समकालीन मुद्दे और प्रगति’ विषय पर प्रस्तुति दी तथा महासचिव डॉ. मधुर गुप्ता ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।












