शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को केंद्र सरकार के उपक्रमों के अधीन चार जलविद्युत परियोजनाओं को अपने नियंत्रण में लेने (टेकओवर) की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण परियोजनाओं की लागत लगातार बढ़ रही है।
मुख्य न्यायाधीश नहीं बल्कि न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने 16 अप्रैल को बताया था कि लुहरी स्टेज-1 (210 मेगावाट), धौलासिद्ध (66 मेगावाट), सुन्नी बांध (382 मेगावाट) और डुगर जलविद्युत परियोजना (500 मेगावाट) को राज्य सरकार के अधीन लाने की प्रक्रिया जारी है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इन परियोजनाओं के लागत मूल्य का आकलन करने के लिए संबंधित कंपनियों से विस्तृत वित्तीय और तकनीकी जानकारी मांगी गई है। इस संबंध में एनएचपीसी और एसजेवीएन लिमिटेड को पत्र भेजकर वर्षवार ऑडिटेड बैलेंस शीट, पूंजीगत कार्यों का विवरण, निर्माणाधीन कार्यों की स्थिति, अचल परिसंपत्तियों का ब्यौरा, भूमि अधिग्रहण, सिविल कार्य, स्थापना एवं रखरखाव पर हुए व्यय, परियोजनाओं से जुड़े ऋण तथा बैंक वित्तपोषण संबंधी विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके अलावा बैंकों को प्रस्तुत मूल्यांकन नोट #Valuation_Note की प्रति भी मांगी गई है।
सुनवाई के दौरान यह भी अदालत के संज्ञान में लाया गया कि एनएचपीसी और एसजेवीएनएल ने इन परियोजनाओं के हस्तांतरण के एवज में निर्माण पर किए गए व्यय के साथ 15 प्रतिशत पर्यवेक्षण #Supervision शुल्क की भी मांग की है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को टेकओवर प्रक्रिया में आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। यह मामला अभी न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय शेष है।












