Advertisement

बायोमेट्रिक उपस्थिति संबंधी पत्र की भाषा पर HGCTA ने जताई कड़ी आपत्ति

Spread the love
उच्च शिक्षा निदेशक को भेजा पत्र, कहा- कुछ अपवादों के आधार पर पूरे शिक्षक समुदाय की कार्यनिष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं


शिमला। हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ (HGCTA) ने उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा हाल ही में राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को जारी बायोमेट्रिक उपस्थिति संबंधी पत्र की भाषा और उसमें की गई सामान्यीकृत टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। संघ ने इस संबंध में निदेशक, उच्च शिक्षा हिमाचल प्रदेश को विस्तृत पत्र भेजकर संबंधित पत्र में प्रयुक्त शब्दों और टिप्पणियों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।


HGCTA के महासचिव डॉ. संजय कानगो ने कहा कि संघ पारदर्शिता, जवाबदेही, समयपालन और संस्थागत अनुशासन का पूर्ण समर्थन करता है। हालांकि विभाग द्वारा जारी पत्र में प्रयुक्त कुछ टिप्पणियों से यह संदेश जाता है कि महाविद्यालय शिक्षक केवल बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराकर अपने दायित्वों का निर्वहन किए बिना संस्थान छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भाषा समस्त शिक्षक समुदाय की निष्ठा, ईमानदारी और पेशेवर प्रतिबद्धता पर अनावश्यक प्रश्नचिह्न लगाती है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षक वर्षों से अध्यापन के साथ-साथ प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाओं, शोध, NAAC प्रत्यायन, छात्र मार्गदर्शन, एनएसएस, एनसीसी, रोवर्स एंड रेंजर्स, युवा महोत्सव, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों, करियर परामर्श, विस्तार गतिविधियों, निर्वाचन कार्यों, आपदा प्रबंधन तथा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सौंपे गए विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का भी पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में कुछ अपवादों के आधार पर पूरे शिक्षक समुदाय की कार्यशैली पर सवाल उठाना उचित नहीं है।


संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. निखिल सारटा ने कहा कि यदि कहीं किसी स्तर पर अनियमितता या कर्तव्यहीनता का मामला सामने आता है तो विभाग के पास नियमानुसार कार्रवाई करने के पर्याप्त प्रशासनिक प्रावधान उपलब्ध हैं। लेकिन कुछ मामलों के आधार पर पूरे शिक्षक समुदाय की कार्यनिष्ठा और ईमानदारी पर प्रश्न उठाना न तो न्यायसंगत है और न ही इससे सकारात्मक कार्य वातावरण बनता है।


उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए निदेशालय और शिक्षक समुदाय के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और रचनात्मक संवाद आवश्यक है। विभागीय पत्राचार की भाषा भी ऐसी होनी चाहिए जो सहयोग और विश्वास का वातावरण तैयार करे, न कि शिक्षकों का मनोबल प्रभावित करे।


संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. सुरिंदर सिंह एवं डॉ. सतीश ठाकुर तथा सहसचिव डॉ. देवेंद्र सिंह और डॉ. चंद्र वर्मा ने भी निदेशक, उच्च शिक्षा से बायोमेट्रिक उपस्थिति संबंधी पत्र की भाषा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

साथ ही उन्होंने मांग की कि विभाग स्पष्ट करे कि उक्त टिप्पणियां पूरे राजकीय महाविद्यालय शिक्षक समुदाय की निष्ठा और प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न लगाने के उद्देश्य से नहीं थीं तथा भविष्य में जारी होने वाले आधिकारिक पत्रों में सामान्यीकृत टिप्पणियों से परहेज किया जाए, ताकि शिक्षक समुदाय की गरिमा और सम्मान अक्षुण्ण बना रहे।