शिमला में मानव तस्करी निरोधक इकाई की बैठक, उपायुक्त बोले- महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, तीन सप्ताह में होगी विशेष कार्यशाला
शिमला। गुमशुदा व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की तलाश में अब किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होगी। लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करनी होगी। यह बात उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने जिला स्तरीय मानव तस्करी निरोधक इकाई (एएचटीयू) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
बैठक में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जी. गणेशा बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में जारी दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने कहा कि गुमशुदगी के मामलों में प्रारंभिक जांच के नाम पर देरी स्वीकार्य नहीं है। प्रत्येक शिकायत को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि मानव तस्करी या अन्य आपराधिक गतिविधियों की आशंका को समय रहते रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) को संसाधनों और आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने पर भी बल दिया है, जिससे गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश और बचाव अभियान अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें। इन निर्देशों के प्रभावी पालन से कानून-व्यवस्था और पुलिस तंत्र के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बच्चों की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम और संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अगले तीन सप्ताह के भीतर जिला स्तर पर विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न विभागों, बाल कल्याण समिति, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, गैर-सरकारी संगठनों तथा अन्य संबंधित एजेंसियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल, नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अंजली चौहान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।












