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हिमाचल के 30 आईटीआई प्रशिक्षु कजाकिस्तान जाएंगे, वैश्विक तकनीकी प्रशिक्षण का मिलेगा अनुभव

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12 जुलाई को तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में रवाना होगा दल, मुख्यमंत्री सुक्खू वर्चुअल माध्यम से करेंगे फ्लैग-ऑफ


शिमला। हिमाचल प्रदेश के 30 मेधावी आईटीआई प्रशिक्षुओं का प्रतिनिधिमंडल पहली बार अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट पर कजाकिस्तान जाएगा। 12 जुलाई को तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में यह दल दिल्ली से रवाना होगा, जबकि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू वर्चुअल माध्यम से इसे फ्लैग-ऑफ करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में 30 प्रशिक्षुओं के अलावा तकनीकी शिक्षा निदेशक और तीन संकाय सदस्य भी शामिल होंगे।


धर्माणी ने शुक्रवार को बताया कि इस दौरे का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणालियों, आधुनिक औद्योगिक तकनीकों और कौशल विकास के अंतरराष्ट्रीय मानकों से परिचित कराना है। प्रतिनिधिमंडल अल्माटी के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा करेगा, जहां प्रशिक्षु वाहन निर्माण इकाई, वाटर बॉटलिंग प्लांट और आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करेंगे। इसके अलावा शिम्बुलक में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी गोंडोला आधारित केबल कार प्रणाली की इंजीनियरिंग और संचालन का भी अध्ययन करेंगे।


प्रतिनिधिमंडल में 21 पुरुष और नौ महिला प्रशिक्षु शामिल हैं, जो प्रदेश के 16 सरकारी आईटीआई और 10 अलग-अलग ट्रेड का प्रतिनिधित्व करेंगे। इनमें इलेक्ट्रीशियन, फिटर, ड्राफ्ट्समैन (सिविल), इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, मैकेनिक मोटर व्हीकल, सूचना प्रौद्योगिकी, मशीनिस्ट, सर्वेयर, वायरमैन और टेक्नीशियन पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम जैसे ट्रेड शामिल हैं।


दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल अल्माटी मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी, अल्माटी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और तूरान यूनिवर्सिटी का भी दौरा करेगा। यहां छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त प्रमाणन पाठ्यक्रम, संकाय प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी।


तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह एक्सपोजर विजिट प्रदेश की आईटीआई प्रशिक्षण प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे कौशल विकास कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ेगी, युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं औद्योगिक साझेदारियों के नए अवसर खुलेंगे।