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हिमालयी राज्यों में जल प्रलय के दौरान सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच: कृष्णराज अरुण

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गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन के सदाचार मिशन के तहत लोगों से सतर्क रहने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील


शिमला/चंडीगढ़। मानसून के दौरान जुलाई और अगस्त में हिमालयी राज्यों में बढ़ते जल प्रलय, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं को देखते हुए गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन ने अपने ‘सदाचार मिशन’ और ‘हिमालय जनजीवन लोक सुरक्षा नैतिक लोक चेतना अभियान’ के तहत लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।


फाउंडेशन के चेयरमैन कृष्णराज अरुण ने विशेष बातचीत में कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रशासन अपनी ओर से हरसंभव सहायता करता है, लेकिन संकट की घड़ी में व्यक्ति की सजगता, धैर्य, विवेक और समय पर लिया गया सही निर्णय ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा बनता है।


उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्रों में जल प्रलय के प्रमुख कारणों में बादल फटना, ग्लेशियर झीलों का अचानक टूटना (जीएलओएफ), भारी बारिश से होने वाले भूस्खलन, मलबा आने की घटनाएं, नदियों के किनारे अनियोजित निर्माण और वनों की अंधाधुंध कटाई प्रमुख हैं।


कृष्णराज अरुण ने कहा कि लोगों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी मौसम संबंधी चेतावनियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। खतरे की स्थिति में नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से तुरंत सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर पहुंच जाना चाहिए।


उन्होंने सलाह दी कि प्रत्येक परिवार के पास एक आपातकालीन किट तैयार रहनी चाहिए, जिसमें पीने का पानी, सूखा राशन, टॉर्च, आवश्यक दवाइयां और प्राथमिक उपचार सामग्री उपलब्ध हो। जलभराव वाले मार्गों को पैदल या वाहन से पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। यदि बाढ़ या मलबा आने का खतरा हो तो बिना देर किए ऊंचे सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए।


उन्होंने कहा कि घर में पानी भरने की स्थिति में बिजली का मुख्य स्विच तुरंत बंद कर दें। परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ रखें तथा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें और केवल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।


कृष्णराज अरुण ने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान धैर्य, अनुशासन और पारस्परिक सहयोग की भावना बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन का ‘सदाचार मिशन’ लोगों में यही संदेश देता है कि प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सामुदायिक सहयोग, जागरूकता और नैतिक जिम्मेदारी से भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।