संदीपनी भारद्वाज का आरोप- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में एक ही अधिकारी आदेश, अपील और दंड की भूमिका निभा रहा; पूर्णकालिक सदस्य सचिव की नियुक्ति की मांग
शिमला। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने प्रदेश सरकार पर पर्यावरण कानूनों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) की मौजूदा व्यवस्था कानून की मूल भावना के विपरीत है और इससे निष्पक्ष प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पूर्णकालिक अध्यक्ष और पूर्णकालिक सदस्य सचिव की व्यवस्था का स्पष्ट प्रावधान है। सदस्य सचिव बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है और सभी प्रशासनिक आदेश तथा एनओसी जारी करने की जिम्मेदारी उसी की होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रदेश सरकार ने पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव को ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंप रखा है। ऐसे में वही अधिकारी सदस्य सचिव के रूप में आदेश जारी करता है और बाद में उन्हीं आदेशों के खिलाफ अपील सुनने तथा दंड निर्धारण की भूमिका भी निभाता है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह व्यवस्था प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत ‘नीमो जुडेक्स इन कॉसा सुआ (Nemo Judex in Causa Sua)’, अर्थात ‘कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता’, का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जब आदेश देने वाला, अपील सुनने वाला और दंड निर्धारित करने वाला एक ही अधिकारी होगा तो निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार प्रशासनिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर कर रही है और कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं लागू करने में विफल रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में तत्काल पूर्णकालिक सदस्य सचिव की नियुक्ति की जाए तथा अपीलीय और न्यायिक प्रक्रिया को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को जनहित और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर विषय मानती है। यदि सरकार ने जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो पार्टी इस मामले को व्यापक स्तर पर उठाएगी।












