2020 बैच के IAS अधिकारी ने संभाला मत्स्य निदेशालय का कार्यभार, सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का दिया भरोसा
धर्मपाल
बिलासपुर। हिमाचल कैडर के 2020 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी ओमकांत ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश मत्स्यकी निदेशालय के नए निदेशक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार ग्रहण करते ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता प्रदेश के मछुवारों के हितों की रक्षा, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना तथा मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना होगी।
ओमकांत ठाकुर इससे पहले बिलासपुर में अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) के पद पर करीब सवा वर्ष तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वह करसोग और मंडी सदर में उपमंडलाधिकारी (SDM) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पांच प्रमुख जलाशय- गोविंद सागर, पोंग डैम, चमेरा, कोल डैम और रणजीत सागर का कुल क्षेत्रफल 43 हजार हेक्टेयर से अधिक है। इन जलाशयों के अलावा प्रदेश के सामान्य जल स्रोतों, ट्राउट जलक्षेत्रों, तालाबों और ट्राउट रेसवे पर लगभग 19 हजार मछुवारे अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, अवैध एवं प्रतिबंधित अवधि के दौरान होने वाले मत्स्य आखेट पर प्रभावी रोक लगाने तथा मत्स्य क्षेत्र को प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की दिशा में विशेष कदम उठाए जाएंगे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर मछुवारों तक पहुंचे।
ओमकांत ठाकुर ने बताया कि जलाशयों में दो माह के बंद सीजन के दौरान मछुवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 4,500 रुपये तथा हिमाचल सरकार की योजना के अंतर्गत 3,500 रुपये यानी कुल 8,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं, ताकि प्रतिबंध अवधि में मछुआरा परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, संसाधनों के बेहतर उपयोग और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और मछुवारों की आय में वृद्धि के लिए विभाग गंभीरता से कार्य करेगा।












