2.52 लाख किसान 44,138 हेक्टेयर में कर रहे प्राकृतिक खेती
आधार आधारित मैपिंग और डिजिटल पोर्टल से जुड़ेगा पूरा रिकॉर्ड
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को और प्रभावी बनाने के लिए किसानों के डिजिटलीकरण, उत्पादों की ब्रांडिंग और बेहतर विपणन पर जोर दिया है। सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का ब्लॉक स्तर पर आधार आधारित डाटा तैयार कर उनकी मैपिंग करेगी, जबकि भूमि, फसल, उत्पादन, खरीद और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल पोर्टल पर लाया जाएगा।
कृषि सचिव सी. पालरासू की अध्यक्षता में बुधवार को कृषि निदेशालय बालूगंज में राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में योजना की प्रगति, किसानों के डिजिटलीकरण, उत्पादों के विपणन और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
कृषि सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों का ब्लॉक स्तर पर आधार आधारित डाटा तैयार कर उसकी मैपिंग सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी किसानों को हिम परिवार रजिस्टर से जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत व्यवस्था के तहत समय पर मिल सके।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती की सफलता केवल उत्पादन बढ़ाने से नहीं, बल्कि उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और संगठित बाजार उपलब्ध कराने से तय होगी। इसके लिए प्रभावी विपणन रणनीति तैयार करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।
बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती से जुड़े सभी आंकड़ों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने की दिशा में काम कर रही है। इससे योजना का क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी होगा और किसानों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना आसान होगा।
प्रदेश में वर्तमान में 2.52 लाख से अधिक किसान 44,138 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार गेहूं, मक्का, हल्दी, पांगी घाटी के जौ और अदरक की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कर रही है।
बैठक में अतिरिक्त निदेशक कृषि डॉ. अतुल डोगरा और डॉ. नीति सोनी, संयुक्त निदेशक डॉ. समीर शर्मा और डॉ. रविंद्र चौहान, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के उपनिदेशक डॉ. मोहिंदर सिंह भवानी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्राकृतिक खेती के प्रमुख आंकड़े
2.52 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े।
44,138 हेक्टेयर भूमि पर हो रही प्राकृतिक खेती।
गेहूं, मक्का, हल्दी, पांगी घाटी के जौ और अदरक की एमएसपी पर खरीद।
किसानों की आधार आधारित मैपिंग और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे।
उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और विपणन पर सरकार का विशेष जोर।












