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नेपाल में 900 मेगावाट अरुण-3 परियोजना की प्रगति की समीक्षा, गुणवत्ता और तय समय पर पूरा करने पर जोर

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केंद्रीय विद्युत सचिव ने किया निरीक्षण, एसजेवीएन की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय परियोजना के निर्माण कार्यों का लिया जायजा


शिमला। भारत सरकार के सचिव (विद्युत) पंकज अग्रवाल ने नेपाल में एसजेवीएन की 900 मेगावाट अरुण-3 जलविद्युत परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। एसजेवीएन अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एसजेवीएन अरुण-3 पावर डेवलपमेंट कंपनी (एसएपीडीसी) के माध्यम से इस रणनीतिक महत्व की अंतरराष्ट्रीय जलविद्युत परियोजना का विकास कर रहा है।


उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद, विद्युत मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (हाइड्रो) दिवाकर नाथ मिश्रा, संयुक्त सचिव (पारेषण) पंकज कुमार, एसजेवीएन के निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल तथा विद्युत मंत्रालय, भारतीय दूतावास, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, एसजेवीएन और एसएपीडीसी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।


दौरे की शुरुआत पुखुवा स्थित भूमिगत विद्युतगृह स्थल के निरीक्षण से हुई, जहां प्रतिनिधिमंडल ने सिविल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्यों सहित परियोजना के प्रमुख निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। इसके बाद फाक्सिंडा स्थित बांध स्थल का दौरा कर बांध, इनटेक प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया।


समीक्षा के दौरान पंकज अग्रवाल ने चुनौतीपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए एसजेवीएन और एसएपीडीसी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने परियोजना टीम से गुणवत्ता, सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए वर्तमान कार्यगति बनाए रखने का आह्वान किया।


एसजेवीएन के निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल ने परियोजना टीम से निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजना का कमीशनिंग लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रखने को कहा।


एसएपीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न निर्माण पैकेजों की प्रगति, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कार्यों, सामुदायिक विकास कार्यक्रमों और पर्यावरण प्रबंधन उपायों की जानकारी दी।


900 मेगावाट अरुण-3 जलविद्युत परियोजना एसजेवीएन की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के चालू होने के बाद यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग को नई मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।