‘खेलो हिमाचल–चिट्टा मुक्त अभियान’ की शुरुआत
3,758 पंचायतों और 76 शहरी निकायों में चलेगा जनजागरण
235 सबसे प्रभावित पंचायतों पर विशेष फोकस
खेल प्रतियोगिताओं के लिए 11.56 करोड़ रुपये मंजूर
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे, विशेषकर ‘चिट्टा’ के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अब खेलों को सबसे बड़ा सामाजिक हथियार बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को ‘खेलो हिमाचल–चिट्टा मुक्त अभियान’ की शुरुआत की रूपरेखा को अंतिम रूप देते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए राज्यव्यापी जन आंदोलन का रूप लेगा।
मुख्यमंत्री ने अभियान की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों का बढ़ता दुष्प्रभाव केवल युवाओं का भविष्य ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामाजिक और आर्थिक संरचना को भी प्रभावित कर रहा है। ऐसे में सरकार कानून के जरिए कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, जागरूकता और पुनर्वास पर समान रूप से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। इसी सोच के तहत गांव-गांव और शहर-शहर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे से दूर रखने का प्रयास किया जाएगा।
हर पंचायत तक पहुंचेगा अभियान
सरकार के अनुसार अभियान प्रदेश की 3,758 ग्राम पंचायतों, 8 नगर निगमों, 29 नगर परिषदों और 39 नगर पंचायतों तक पहुंचेगा। इसके अलावा नशे से सर्वाधिक प्रभावित चिन्हित 235 ग्राम पंचायतों में विशेष अभियान चलाया जाएगा, जहां लगातार खेल प्रतियोगिताएं, जनजागरूकता कार्यक्रम, सामुदायिक संपर्क अभियान और युवा सहभागिता गतिविधियां आयोजित होंगी।
तीन स्तरों पर होंगी प्रतियोगिताएं
अभियान के तहत खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन उपमंडल, जिला और राज्य स्तर पर किया जाएगा। इनके संचालन और निगरानी के लिए खेल संघों, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग, शिक्षा विभाग तथा पुलिस विभाग के अधिकारियों और रेफरियों की तकनीकी समिति गठित की जाएगी।
सरकार ने प्रतियोगिताओं के आयोजन और विजेता एवं उपविजेता टीमों को पुरस्कार देने के लिए 11.56 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है।
सरकार का संदेश, नशा मुक्त हिमाचल, सबकी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और सशक्त युवा पीढ़ी ही हिमाचल के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों, खेल संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय निकायों और समाज के प्रत्येक वर्ग को इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनना होगा।
उन्होंने कहा कि समय रहते जागरूकता, सामुदायिक सहयोग और सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराकर ही युवाओं को नशे के दलदल में जाने से रोका जा सकता है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नशे के कारोबार पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि युवाओं को बेहतर जीवन की दिशा देना भी है।
बैठक में सचिव युवा सेवाएं एवं खेल प्रियंका बसु इंग्टी, निदेशक शिवम प्रताप सिंह, विशेष सचिव नवीन तन्वर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।












