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वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस-लेफ्ट एक मंच पर, 1 नवंबर को दिल्ली कूच का आह्वान

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रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची पर उठाए सवाल


चुनावी गठबंधन पर स्थिति साफ नहीं, मुद्दों के आधार पर एकजुटता; रजनी पाटिल बोलीं- लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दलों को आना होगा साथ


शिमला। कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और वामपंथी दल एक मंच पर आ गए हैं। शनिवार को शिमला में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में कांग्रेस और वामपंथी नेताओं ने केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को सफल बनाने का आह्वान किया। इंडिया ब्लॉक की ओर से आयोजित इस रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। नेताओं ने हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से दिल्ली पहुंचने की अपील की।


प्रेसवार्ता में कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश प्रभारी एवं पूर्व सांसद रजनी पाटिल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, कांग्रेस नेता राव दान सिंह, कुलदीप राठौर, एआईसीसी सचिव विदित चौधरी सहित माकपा के प्रदेश सचिव संजय चौहान और भाकपा नेता राकेश सिंघा समेत अन्य नेता मौजूद रहे। प्रेसवार्ता में कांग्रेस और वामपंथी दलों की साझा मौजूदगी ने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता का संदेश दिया। हालांकि, चुनाव साथ लड़ने को लेकर नेताओं ने कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मताधिकार और लोकतंत्र की रक्षा जैसे सवालों पर साझा संघर्ष जरूरी है।


चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज करने का ऐलान


कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने आरोप लगाया कि देश में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए। पाटिल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।


उन्होंने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध का पहला चरण 2 अक्टूबर से शुरू किया गया था, जिसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन किए गए। अब 26 अक्टूबर से विरोध का दूसरा चरण शुरू होगा। इसके तहत जिला स्तर पर प्रेसवार्ताएं आयोजित की जाएंगी, जबकि 12 से 25 नवंबर तक विधानसभा स्तर पर राजनीतिक चौपालों के माध्यम से लोगों तक यह मुद्दा पहुंचाया जाएगा।


पाटिल ने कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली विपक्षी दलों की एकजुटता का बड़ा मंच होगी। उन्होंने हिमाचल के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से इसमें अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।


राकेश सिंघा बोले- यह केवल राजनीतिक रैली नहीं, लोकतंत्र बचाने की लड़ाई


भाकपा नेता राकेश सिंघा ने कहा कि 1 नवंबर की रैली को केवल राजनीतिक आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी विभिन्न विचारधाराओं के लोगों ने एकजुट होकर संघर्ष किया था। आज भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर साथ आने की जरूरत है।


सिंघा ने केंद्र सरकार पर विरोध की आवाजों को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले संगठनों और लोगों को एकजुट रहना होगा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख करते हुए वयस्क मताधिकार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वोट का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी सुरक्षा के लिए किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।


उन्होंने कहा कि वे आखिरी सांस तक इस लड़ाई को जारी रखेंगे और 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली में बड़ी संख्या में शामिल होंगे। सिंघा ने चेतावनी दी कि रैली को रोकने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें कहीं रोका गया, तो वहीं रामलीला मैदान बना दिया जाएगा।


संजय चौहान बोले- लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होना होगा
माकपा के प्रदेश सचिव संजय चौहान ने भी कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस को समर्थन देते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष संगठनों को एक साथ आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारधारा और नीतियों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब सवाल नागरिकों के मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हो, तो साझा मंच पर संघर्ष करना जरूरी है।


वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का रवैया लोकतांत्रिक आंदोलनों के प्रति दमनकारी रहा है। उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक के सहयोगी कथित वोट चोरी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना था कि यह संघर्ष किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखने वाले सभी लोगों का साझा मुद्दा है।


विनय कुमार और राव दान सिंह ने भी मांगा जनता का समर्थन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्षी दलों का एक मंच पर आना जरूरी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश से अधिक से अधिक लोगों से दिल्ली पहुंचकर रैली में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों में विश्वास रखने वाले सभी लोगों की है।।


कांग्रेस नेता राव दान सिंह ने आरोप लगाया कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है और बड़े पूंजीपतियों का प्रभाव बढ़ने से लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने भाजपा पर पूंजीपतियों के हितों के अनुरूप काम करने का आरोप लगाया। दान सिंह ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी लोकतांत्रिक ताकतों को मिलकर प्रयास करना होगा।


कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर सहित अन्य नेताओं ने भी मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। नेताओं ने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना और उसके मताधिकार की रक्षा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।


फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल


प्रेसवार्ता में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की प्रक्रिया का भी मुद्दा उठा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में निर्धारित कानूनी प्रावधानों और नियमों का पूरी तरह पालन होना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।


वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए उनकी कार्यप्रणाली की आलोचना की और पद छोड़ने की मांग भी उठाई। हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुद्दों पर साथ, चुनावी गठबंधन पर अभी तस्वीर साफ नहीं
संयुक्त प्रेसवार्ता के दौरान पत्रकारों ने कांग्रेस और वामपंथी दलों की एकजुटता तथा राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के साथ आने को लेकर सवाल भी पूछे।

इस पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इंडिया ब्लॉक के सहयोगी मुद्दों के आधार पर साथ आए हैं। कथित वोट चोरी और मताधिकार का सवाल केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मुद्दे देशभर में उठाए जा रहे हैं।


नेताओं ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच चुनावी मुकाबला होने के बावजूद लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर साझा मंच बनाया जा सकता है। उन्होंने वामपंथी दलों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए भविष्य में भी मिलकर काम करने की बात कही।


हालांकि, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और वामपंथी दल आगामी चुनाव साथ लड़ेंगे या नहीं, इस पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया। संयुक्त प्रेसवार्ता में दोनों पक्षों की मौजूदगी को फिलहाल कथित वोट चोरी के मुद्दे पर साझा राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मंच पर वामपंथी नेताओं की मौजूदगी के बावजूद पोस्टर और बैनर में वामपंथी दलों का उल्लेख नहीं था। वहीं, रजनी पाटिल ने अपनी फ्लाइट का हवाला देते हुए पत्रकारों के सवालों से परहेज किया।


फिलहाल, कांग्रेस और वामपंथी दलों की प्राथमिकता 1 नवंबर की रैली को सफल बनाना है। नेताओं ने हिमाचल प्रदेश की जनता, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों से दिल्ली पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।