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राष्ट्रहित सर्वोपरि: नैतिक जवाबदेही ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत

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समाजसेवी पंकज सिंह ठाकुर बोले- धर्मेंद्र प्रधान का नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर इस्तीफा लोकतंत्र को करेगा मजबूत


भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी वास्तविक शक्ति केवल चुनावों में नहीं, बल्कि जनविश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही में निहित है। लोकतंत्र तब और मजबूत होता है, जब सार्वजनिक जीवन में पद पर आसीन व्यक्ति अधिकारों के साथ-साथ अपने उत्तरदायित्वों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।


NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा देश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों और उनके भविष्य से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं, तो यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बन जाता है।


यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा देते हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र में जवाबदेही और नैतिक नेतृत्व का एक ऐतिहासिक उदाहरण माना जाएगा। ऐसा निर्णय किसी व्यक्तिगत दोष को स्वीकार करना नहीं, बल्कि यह संदेश होगा कि लोकतंत्र में सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति भी जनता के प्रति पूर्णतः उत्तरदायी है।


भारत में पेपर लीक की घटनाएं किसी एक सरकार, राज्य या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रही हैं। अलग-अलग समय पर विभिन्न राज्यों में ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


आज आवश्यकता है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया जाए। आधुनिक डिजिटल सुरक्षा, कठोर कानून, समयबद्ध जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और हर स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही ही भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगा सकती है।


यदि धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त संदेश होगा कि सार्वजनिक जीवन में पद से बड़ा चरित्र, सत्ता से बड़ी नैतिकता और अधिकार से बड़ा उत्तरदायित्व होता है। ऐसे निर्णय लोकतंत्र में जनता का विश्वास मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी तथा उत्तरदायी बनाते हैं।


राष्ट्रहित किसी भी व्यक्ति, पद या राजनीतिक दल से ऊपर है। जब शासन में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च मूल्य बनेंगे, तभी युवाओं का विश्वास मजबूत होगा और भारत एक अधिक न्यायपूर्ण, विश्वसनीय तथा सशक्त राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ेगा।


राष्ट्र पहले, पद बाद में यही सच्चे जनसेवक की पहचान है।
-पंकज सिंह ठाकुर
समाजसेवी