किशाऊं बांध प्रभावितों को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलेगा मुआवजा : सुक्खू
मुख्यमंत्री बोले- हिमाचल के पानी से दूसरी कंपनियां हो रहीं मालामाल, जल संसाधनों पर प्रदेश को मिलना चाहिए ज्यादा हिस्सा
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किशाऊं बहुउद्देशीय परियोजना से प्रभावित होने वाले हिमाचल प्रदेश के लोगों को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत उचित मुआवजा दिया जाएगा। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊं परियोजना में हिमाचल के कम गांव प्रभावित हो रहे हैं, जबकि अधिक गांव उत्तराखंड के क्षेत्र में आते हैं। हिमाचल में जिन परिवारों की जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित होगी, उन्हें नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध करवाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपने जल अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष किया है और यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले समय में पानी की कीमत और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि बीवीएमपी और शानन पावर प्रोजेक्ट को लेकर भी हिमाचल अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा।
14 हजार मेगावाट बिजली, फिर भी हिस्सेदारी कम
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बांधों के माध्यम से करीब 14 हजार मेगावाट हाइड्रो और रिन्यूएबल ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। इसका लाभ एनटीपीसी, एनएचपीसी और एसजेवीएनएल जैसी कंपनियों को मिल रहा है, जबकि प्रदेश को वर्तमान में केवल 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली और एक प्रतिशत एलएडीएफ (LADA) मिलता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल अपने जल संसाधनों के बदले इससे कहीं अधिक हिस्सेदारी का हकदार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष भी हिमाचल को अधिक मुफ्त बिजली देने की मांग उठाई है। उनका प्रस्ताव है कि परियोजना की लागत करीब 12 वर्ष में पूरी होने के बाद 12 से 30 वर्ष तक हिमाचल को 30 प्रतिशत मुफ्त बिजली दी जानी चाहिए। इसके बाद 40 वर्ष पूरे होने पर परियोजना राज्य सरकार को मिलनी चाहिए। यदि इसके बाद कोई कंपनी परियोजना का संचालन करती है तो हिमाचल को 50 प्रतिशत मुफ्त बिजली मिलनी चाहिए।
जल संपदा से कंपनियां मजबूत, हिमाचल को नुकसान
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल की जल संपदा से बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, लेकिन इसके अनुपात में प्रदेश को पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि हिमाचल देश को पर्यावरणीय सेवाओं के रूप में हर वर्ष करीब 90 हजार करोड़ रुपये का योगदान देता है। इनमें स्वच्छ हवा उपलब्ध करवाना, ग्लेशियरों का संरक्षण और नदियों के जल को सुरक्षित रखना शामिल है।
उन्होंने कहा कि एक ओर हिमाचल देश को महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवाएं दे रहा है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रदेश को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में जल और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभ में हिमाचल को उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
किशाऊं परियोजना में 50 फीसदी कर्मचारी हिमाचल से
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊं परियोजना के निर्माण के बाद इसमें 50 प्रतिशत कर्मचारी हिमाचल प्रदेश और 50 प्रतिशत उत्तराखंड से होंगे। परियोजना को जल्द पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किशाऊं परियोजना से प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा की जाएगी और उन्हें कानून के अनुसार मुआवजा मिलेगा।
सुक्खू ने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश अपने जल और प्राकृतिक संसाधनों पर उचित अधिकार और हिस्सेदारी के लिए आगे भी मजबूती से अपनी लड़ाई जारी रखेगा।












