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चमियाना में AI आधारित 3-टेस्ला MRI का शुभारंभ, स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव; 125 करोड़ की ऑटोमेशन लैब बनाएगी सरकार

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सीएम सुक्खू बोले- ‘जीरो वेटिंग’ लक्ष्य, रोबोटिक सर्जरी होगी और सुलभ; भारी बारिश से नुकसान पर अगले सप्ताह आपदा प्रबंधन की उच्चस्तरीय बैठक


शिमला। हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में शनिवार को बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान (चमियाना) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित 3-टेस्ला एमआरआई मशीन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के मरीजों को ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिनके लिए अब तक उन्हें निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।


इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल, शिमला शहरी के विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कार्यभार संभालने के साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी और अब इन क्षेत्रों में व्यवस्था परिवर्तन के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में वर्षों पुरानी तकनीक को बदलकर आधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं।


सुक्खू ने बताया कि चमियाना के साथ-साथ आईजीएमसी शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा, नेरचौक और हमीरपुर में भी 3-टेस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जा रही हैं। दिल्ली एम्स की तर्ज पर स्थापित इन मशीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक इनबिल्ट है, जिससे मस्तिष्क, रीढ़, हृदय और नसों से जुड़ी जटिल बीमारियों की अधिक सटीक एवं तेज जांच संभव होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य मरीजों को जांच के लिए लंबी प्रतीक्षा से राहत दिलाना है और भविष्य में ‘जीरो वेटिंग’ व्यवस्था लागू करना है, ताकि मरीजों को उसी दिन जांच की सुविधा मिल सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत भी स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है। चमियाना, आईजीएमसी, टांडा और नेरचौक में यह सुविधा शुरू हो चुकी है। निजी अस्पतालों में जहां ऐसी सर्जरी पर पांच लाख रुपये तक खर्च आते हैं, वहीं सरकारी अस्पतालों में इसे मात्र 50 हजार रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार प्रत्येक ऑपरेशन पर लगभग 65 हजार रुपये की सब्सिडी वहन कर रही है, ताकि आम मरीज भी आधुनिक उपचार का लाभ उठा सकें।


स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सटीक, पारदर्शी तथा मानवीय त्रुटियों से मुक्त बनाने के लिए सरकार अगले तीन महीनों में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में विश्वस्तरीय ऑटोमेशन लैब स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना पर लगभग 125 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से अधिकांश लैब जांच अत्याधुनिक ऑटोमेटेड प्रणाली से होंगी, जिससे रिपोर्ट की गुणवत्ता बढ़ेगी और मरीजों को कम लागत पर बेहतर सेवाएं मिलेंगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के परिणाम चरणबद्ध तरीके से सामने आएंगे, लेकिन अगले पांच वर्षों में प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक स्वरूप में दिखाई देगी। उन्होंने बताया कि जिन अस्पतालों में चिकित्सकों और असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी है, वहां तेजी से नियुक्तियां की जा रही हैं। साथ ही डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए उनके वेतनमान में भी सुधार करने की दिशा में सरकार काम कर रही है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और उससे हुए नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किन्नौर सहित कई जिलों में भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जान-माल का व्यापक नुकसान हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव को सभी जिला उपायुक्तों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा और आगामी रणनीति तय करने के लिए अगले सप्ताह आपदा प्रबंधन पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी।


मुख्यमंत्री ने मानसून सीजन में हिमाचल आने वाले पर्यटकों से भी विशेष सतर्कता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आने वाले सभी पर्यटकों का स्वागत है, लेकिन वे अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। विशेष रूप से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।