संपत्ति बढ़ने के आरोपों को बताया भ्रामक, कहा- मुख्यमंत्री बनने के बाद नहीं खरीदी कोई नई संपत्ति; कांग्रेस में ‘बिकने वालों’ की जरूरत नहीं
शिमला। एडीआर (Association for Democratic Reforms) की रिपोर्ट को लेकर भाजपा के हमलों के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को तीखा पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक दुष्प्रचार करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा एडीआर रिपोर्ट की आड़ में उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रही है, जबकि उनकी संपत्तियों का पूरा ब्योरा पहले से सार्वजनिक है और चुनावी शपथपत्र में दर्ज है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कोई नई संपत्ति नहीं खरीदी। जिस जमीन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह उन्होंने वर्षों पहले खरीदी थी। समय के साथ उसकी बाजार कीमत बढ़ी है और उसी भूमि पर उनका मकान बना है, जिसकी कीमत में भी स्वाभाविक वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इसे संपत्ति में अचानक बढ़ोतरी बताना पूरी तरह भ्रामक है।
सुक्खू ने एडीआर रिपोर्ट की सटीकता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में उनकी शैक्षणिक योग्यता तक अधूरी दिखाई गई है। उन्होंने एमए और एलएलबी की डिग्रियों का उल्लेख न होने को गंभीर त्रुटि बताते हुए कहा कि जब मूल तथ्य ही गलत हैं तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के पास ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां हैं। पहले भी उनकी जांच हो चुकी है और यदि भाजपा को कोई संदेह है तो फिर से जांच करा ले। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवनभर मेहनत और ईमानदारी से कमाई की है तथा उन्हें किसी जांच का डर नहीं है।
राजनीतिक मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने आक्रामक तेवर अपनाए।
कांग्रेस विधायकों के भाजपा में जाने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि यदि कोई विधायक पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोकने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस को विचारधारा से जुड़े लोगों की आवश्यकता है, बिकने वालों की नहीं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कई विधायक भी कांग्रेस के संपर्क में हैं, लेकिन कांग्रेस “पेपर लीक और चंदा चोर” की छवि वाली भाजपा से किसी नेता को शामिल नहीं करेगी।
शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने प्रियंका गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि देश का शिक्षा मंत्री ऐसा होना चाहिए जिसकी छवि निष्कलंक हो, जो शिक्षा के क्षेत्र की समझ रखता हो और जिसके कार्यकाल में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों।
मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि एडीआर रिपोर्ट को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब सीधे कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप की नई लड़ाई में बदल गई है। कांग्रेस इसे भाजपा का दुष्प्रचार बता रही है, जबकि भाजपा रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा हिमाचल की राजनीति में और अधिक गर्माने के आसार हैं।












