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देउरी स्कूल भवन उद्घाटन विवाद हाई कोर्ट पहुंचा, सरकार को नोटिस, पूछा- तैयार भवन में अब तक क्यों नहीं शिफ्ट किए छात्र?

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शिक्षा मंत्री के उद्घाटन किए बिना लौटने के मामले पर जनहित याचिका, 22 जुलाई तक शिक्षा विभाग और मंडी प्रशासन से मांगा जवाब


शिमला। मंडी जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र की देउरी पंचायत स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर द्वारा किए बिना लौटने का मामला अब हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।


मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सचिव शिक्षा, निदेशक उच्च शिक्षा, उपायुक्त मंडी, उपनिदेशक उच्च शिक्षा मंडी तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला देउरी के प्रधानाचार्य को नोटिस जारी करते हुए 22 जुलाई से पहले जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।


याचिकाकर्ता कुंजलाल की ओर से अधिवक्ता उदयनंद शर्मा ने अदालत को बताया कि नए स्कूल भवन का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था और उद्घाटन पट्टिका भी स्थापित कर दी गई थी। शिक्षा मंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, लेकिन भवन का उद्घाटन किए बिना ही लौट गए। इसके बाद से तैयार भवन का उपयोग शुरू नहीं हो सका।


याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2023 की आपदा में स्कूल का पुराना भवन क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद विद्यार्थियों की पढ़ाई किराए के भवन में कराई जा रही है। नया भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद छात्रों को अब तक वहां स्थानांतरित नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान किराए का भवन पुराना है और बरसात के मौसम में सुरक्षा की दृष्टि से भी उपयुक्त नहीं है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता बनी हुई है।


हाई कोर्ट ने उठाया अहम कानूनी सवाल


सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस पहलू को गंभीर माना कि जब स्कूल भवन तैयार है तो विद्यार्थियों को अब तक वहां क्यों नहीं भेजा गया। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।


यह मामला अब केवल उद्घाटन कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तैयार सरकारी भवन का उपयोग न होने और विद्यार्थियों के सुरक्षित शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों पर भी न्यायिक समीक्षा का विषय बन गया है। अदालत के नोटिस के बाद अब सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि भवन तैयार होने के बावजूद उसका संचालन शुरू करने में देरी क्यों हुई।