7–8 हजार हेक्टेयर में होगा पौधरोपण, पहली बार चिनार पर विशेष फोकस; राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र होगा कवर।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून सीजन के दौरान वन विभाग बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाएगा। विभाग ने राज्यभर में 7 से 8 हजार हेक्टेयर भूमि पर 50 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। इनमें करीब 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में राज्य सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत पौधरोपण किया जाएगा। पहली बार प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप चिनार के पौधों के रोपण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। अभियान का उद्देश्य वर्ष 2030 तक मिशन-32 के तहत प्रदेश के हरित आवरण को 32 प्रतिशत तक बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करना है।
वन विभाग ने सभी वन मंडलों में अभियान की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वन बल प्रमुख डॉ. संजय सूद ने सभी वन मंडलाधिकारियों को राजीव गांधी वन संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना और राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से पौधरोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण में भी सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।
इस अभियान में जाइका वानिकी परियोजना भी अहम भूमिका निभाएगी। परियोजना ने वर्ष 2018 से 2025 के बीच प्रदेश के 22 वन मंडलों में 8,343 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर हरित क्षेत्र बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना के तहत भी परियोजना ने 124 हेक्टेयर क्षेत्र में सफल पौधरोपण किया था।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर शिमला में चिनार का पौधा लगाकर इस वर्ष के पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया था। इसके बाद 25 जून को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह सिंधवालिया ने भी विशेष पौधरोपण अभियान की शुरुआत की। वन विभाग का कहना है कि प्रदेशभर में इस तरह के अभियान लगातार चलाए जाएंगे ताकि मिशन-32 के लक्ष्य को जनसहभागिता के साथ समय पर पूरा किया जा सके।












