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पेंशनर्स का सुक्खू सरकार को 31 जुलाई तक का अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानीं तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

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8 अगस्त को शाहपुर में जुटेंगे 18 पेंशनर संगठन, छठे वेतन आयोग की लंबित देनदारियों और डीए की किश्तों पर बनेगी आंदोलन की रणनीति


शिमला। हिमाचल प्रदेश में लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर पेंशनरों ने सुक्खू सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी दी है। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार को 31 जुलाई तक छठे वेतन आयोग की लंबित देनदारियों के भुगतान और महंगाई भत्ते (डीए) की किश्तों को लेकर अधिसूचना जारी करने का अल्टीमेटम दिया है।

समिति ने साफ किया है कि तय समय सीमा तक सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं हुई तो 8 अगस्त को शाहपुर में प्रदेश के 18 पेंशनर संगठनों का राज्य स्तरीय सम्मेलन बुलाकर बड़े आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।


संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम शर्मा ने सोमवार को प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ हुई बैठकों के दौरान सरकार ने 31 जुलाई 2026 तक छठे वेतन आयोग की 40 प्रतिशत लंबित देनदारियों के भुगतान का आश्वासन दिया था।

इसके अलावा 15 अगस्त तक महंगाई भत्ते की दो किश्तें जारी करने की बात भी कही गई थी। उनका आरोप है कि समय सीमा नजदीक आने के बावजूद अभी तक इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।


उन्होंने कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधि लगातार वित्त विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास कर रहे हैं। समिति की मांग है कि सरकार 31 जुलाई से पहले संबंधित अधिसूचना जारी करे, ताकि प्रदेश के लाखों पेंशनरों को राहत मिल सके।


एक जनवरी 2016 से लंबित देनदारियां प्रमुख मुद्दा


भूप राम शर्मा ने कहा कि समिति का प्रमुख मुद्दा एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक की लंबित वित्तीय देनदारियों का भुगतान है। इसे लेकर प्रदेशभर में ब्लॉक और जिला स्तर पर पेंशनरों की बैठकें चल रही हैं।

उन्होंने दावा किया कि लंबित भुगतान नहीं होने से पेंशनरों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है।
समिति ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि 31 जुलाई तक किए गए वादों के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो पेंशनर अब इंतजार नहीं करेंगे। 8 अगस्त को शाहपुर में 18 पेंशनर संगठनों के राज्य स्तरीय सम्मेलन में आंदोलन को तेज करने और आगामी रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।


‘आपदा के नाम पर मांगों को नहीं टाल सकती सरकार’


संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार की वित्तीय स्थिति और आपदा संबंधी तर्कों पर भी सवाल उठाए। समिति का कहना है कि आपदा का हवाला देकर पेंशनरों की लंबित देनदारियों को लगातार टाला नहीं जा सकता। सरकार ने यदि भुगतान और डीए को लेकर समय सीमा तय की थी तो अब उस पर अमल भी होना चाहिए।


भूप राम शर्मा ने कहा कि 31 जुलाई तक अधिसूचना जारी नहीं होने की स्थिति में प्रदेशभर के पेंशनर एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। शाहपुर सम्मेलन में आंदोलन के स्वरूप और आगे की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।