सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की तैयारी, छात्रों को प्रदेश में ही मिलेगा अधिक अवसर
शिमला। हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रदेश के छह राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो एक ही चरण में पीजी सीटों में यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी होगी। इससे न केवल प्रदेश के मेडिकल छात्रों को राज्य में ही स्नातकोत्तर शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे, बल्कि आने वाले वर्षों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज लंबे समय से विभिन्न विशेषज्ञताओं में डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। सरकार का मानना है कि पीजी सीटों में वृद्धि से अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं मजबूत होंगी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। पीजी डॉक्टर मरीजों के उपचार के साथ-साथ मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण देने, शोध कार्य और अस्पतालों की क्लीनिकल सेवाओं को संचालित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सीटें बढ़ने का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा।
प्रस्ताव के अनुसार इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला में पीजी सीटों की संख्या 139 से बढ़ाकर 230 करने की योजना है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में सीटें 99 से बढ़ाकर 156, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मंडी में 24 से बढ़ाकर 79, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नाहन में 3 से बढ़ाकर 35, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, चंबा में 4 से बढ़ाकर 32 तथा डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में 8 से बढ़ाकर 65 करने का प्रस्ताव रखा गया है।
पीजी सीटों के इस बड़े विस्तार को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में चिकित्सा महाविद्यालयों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर विशेषज्ञों के 218 नए पद भी सृजित किए हैं। इनमें टांडा मेडिकल कॉलेज में 54, नाहन में 31, चंबा में 32, मंडी में 36, हमीरपुर में 63 और अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी, चमियाना में दो पद शामिल हैं। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त विशेषज्ञ स्टाफ की नियुक्ति से मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी और मरीजों को बेहतर विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सीनियर रेजिडेंट किसी भी बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की रीढ़ होते हैं। वे मरीजों के उपचार, मेडिकल शिक्षा, शोध और क्लीनिकल प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही वे वरिष्ठ शिक्षकों और मेडिकल छात्रों के बीच एक अहम कड़ी के रूप में कार्य करते हैं, जिससे अस्पतालों की सेवाएं सुचारु रूप से संचालित होती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीजी सीटों में बढ़ोतरी से प्रदेश में अधिक संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होंगे, जिससे लोगों की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक भवन, अत्याधुनिक जांच सुविधाएं, उन्नत प्रयोगशालाएं और बेहतर शिक्षण संसाधन विकसित करने पर लगातार निवेश कर रही है। सरकार का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाना है, ताकि लोगों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होकर लागू होता है तो इसका लाभ केवल मेडिकल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से आम लोगों को भी बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। यह विस्तार भविष्य में हिमाचल की चिकित्सा व्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।












