Advertisement

अब हिमाचल की हर नई सड़क का होगा ‘सेफ्टी टेस्ट’, सरकार लाई रोड सेफ्टी ऑडिट नीति

Spread the love
एक करोड़ से अधिक लागत वाली सभी सड़क परियोजनाओं का अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट, स्वतंत्र ऑडिटर करेंगे जांच
पीडब्ल्यूडी मुख्यालय में बनेगा रोड सेफ्टी सेल

शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब सड़कें केवल बनेंगी ही नहीं, बल्कि उन पर यातायात शुरू होने से पहले उनकी सुरक्षा की भी वैज्ञानिक जांच होगी। लगातार सड़क हादसों को कम करने और पर्वतीय सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू करने का निर्णय लिया है। यह नीति लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आने वाली सभी सड़क परियोजनाओं पर लागू होगी और एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रत्येक परियोजना में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होगा।

प्रदेश सरकार का दावा है कि वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, लेकिन दुर्घटनाओं को और कम करने के लिए अब निर्माण प्रक्रिया में ही सुरक्षा मानकों को शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो यह हिमाचल में सड़क निर्माण की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

पांच चरणों में होगी सड़क की सुरक्षा जांच

नई नीति के तहत किसी भी सड़क परियोजना का सुरक्षा ऑडिट केवल निर्माण पूरा होने के बाद नहीं, बल्कि पांच अलग-अलग चरणों में किया जाएगा। इसमें प्रारंभिक योजना, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), निर्माण के दौरान, सड़क को यातायात के लिए खोलने से पहले तथा पहले से बनी सड़कों का समय-समय पर ऑडिट शामिल रहेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क बनने के बाद सामने आने वाली कमियों को पहले ही पहचानकर दूर किया जा सके।

स्वतंत्र ऑडिटर ही करेंगे निरीक्षण

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा ऑडिट केवल भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) से प्रमाणित रोड सेफ्टी ऑडिटर अथवा विशेष प्रशिक्षण प्राप्त और पर्वतीय सड़क निर्माण का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले अधिकारियों द्वारा ही किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस परियोजना का ऑडिट किया जाएगा, उससे ऑडिटर का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होगा, ताकि रिपोर्ट पूरी तरह निष्पक्ष रहे।

पीडब्ल्यूडी में बनेगा रोड सेफ्टी सेल

नीति के तहत लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक समर्पित रोड सेफ्टी सेल स्थापित किया जाएगा। यह सेल सभी सड़क सुरक्षा ऑडिट की निगरानी करेगा, योग्य ऑडिटरों का पैनल तैयार करेगा, अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा करेगा तथा अभियंताओं के प्रशिक्षण और जन-जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित करेगा। अभियंता-प्रमुख प्रत्येक तीन महीने में इसकी समीक्षा करेंगे।

परियोजना लागत का एक प्रतिशत सुरक्षा ऑडिट पर खर्च होगा

नई व्यवस्था के अनुसार एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में कुल परियोजना लागत का एक प्रतिशत केवल सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा सड़क संकेतक, मार्किंग, क्रैश बैरियर, पैदल यात्री सुविधाएं, चौराहों की डिजाइन, पर्वतीय सड़कों के सुरक्षा मानक और भारतीय सड़क कांग्रेस के सभी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।

पर्वतीय राज्य होने के कारण बढ़ी जिम्मेदारी

हिमाचल प्रदेश में दुर्गम पहाड़, तीखे मोड़, भूस्खलन और खराब मौसम सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह रहे हैं। ऐसे में सड़क विशेषज्ञ लंबे समय से निर्माण के साथ सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य बनाने की मांग कर रहे थे। नई नीति को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दुर्घटनाओं में आई कमी, लेकिन चुनौती अभी भी बड़ी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में प्रदेश में 2,253 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जो वर्ष 2024 में घटकर 2,107 रह गईं। इसी अवधि में सड़क हादसों में मौतों की संख्या 892 से घटकर 806 और घायलों की संख्या 3,449 से घटकर 3,290 हो गई। इसके बावजूद हर वर्ष सैकड़ों लोगों की जान जाने के कारण सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला लिया है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, सक्षम और टिकाऊ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सड़क परियोजना में मानव जीवन और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी तथा स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से निर्माण के हर चरण में संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

नई नीति के लागू होने के बाद हिमाचल उन राज्यों में शामिल होगा जहां सड़क निर्माण को केवल इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि ‘सेफ रोड’ की अवधारणा के साथ जोड़ा जा रहा है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद की जा रही है।