शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर बोले- 2027-28 सत्र से लागू होंगी नई किताबें, विद्यार्थियों को प्रदेश की विरासत और समकालीन विषयों से कराया जाएगा परिचित
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब अपनी ही धरती के इतिहास, संस्कृति और पहचान से जुड़ी व्यापक जानकारी पाठ्यक्रम के माध्यम से मिलेगी। राज्य सरकार ने छठी से आठवीं कक्षा की पुस्तकों में बड़े बदलाव का फैसला लिया है। नए पाठ्यक्रम में हिमाचल का इतिहास, अर्थव्यवस्था, राजनीति, बोलियां, लोक संस्कृति, व्यंजन, स्वतंत्रता सेनानी, सैनिकों का योगदान और प्रदेश की वर्तमान चुनौतियों जैसे विषय शामिल किए जाएंगे।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में वीरवार को आयोजित बैठक में पाठ्यक्रम संशोधन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि हिमाचल के प्रागैतिहासिक काल से लेकर राज्य के गठन तक के इतिहास को रोचक और तथ्यपरक तरीके से पुस्तकों में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश की विभिन्न बोलियों, पारंपरिक व्यंजनों, लोक संस्कृति, कारगिल वीरों, स्वतंत्रता सेनानियों, अर्थव्यवस्था, राजनीति और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों को भी स्थान दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस नई सामग्री को एक महीने के भीतर अंतिम रूप देकर पुस्तकों के प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन संशोधित पुस्तकों को शैक्षणिक सत्र 2027-28 से स्कूलों में लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश आधारित सामग्री को पाठ्यक्रम में शामिल करने का उद्देश्य विद्यार्थियों में अपने राज्य के प्रति समझ, विश्लेषणात्मक सोच और शोध की रुचि विकसित करना है। इससे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में भी लाभ मिलेगा, क्योंकि हिमाचल से जुड़े विषय विभिन्न परीक्षाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
रोहित ठाकुर ने बताया कि पाठ्यक्रम में बदलाव और सुधार के लिए गठित समिति नियमित रूप से बैठकें कर रही है। समिति में शिक्षा विभाग, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, एससीईआरटी और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं, जो नई पुस्तकों की सामग्री को अंतिम रूप दे रहे हैं।
बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, शिक्षा बोर्ड के सचिव अंकुश शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह, एससीईआरटी की प्रिंसिपल डॉ. रितु शर्मा सोनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।












