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नई औद्योगिक नीति से निवेश को रफ्तार, उद्योगों को मिलेगी सस्ती बिजली, पंजाब से तीन साल का बिजली समझौता करेगा हिमाचल

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आईटी, ग्रीन एनर्जी, हेल्थ टूरिज्म और पर्यटन पर बड़ा दांव
निवेशकों से बोले मुख्यमंत्री- हिमाचल देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य


चंडीगढ़/शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में निवेश का नया माहौल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि प्रदेश की नई औद्योगिक नीति शीघ्र लागू की जाएगी, जिसके तहत उद्योगों को प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल को निवेश, आईटी, हरित ऊर्जा और पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है।


द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (TiE) चंडीगढ़ के 23वें वार्षिक सम्मेलन एवं चंडीगढ़ लीडरशिप कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने देश-विदेश के निवेशकों को हिमाचल में निवेश का खुला निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग और तेज़ी से मंजूरियां उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। इसी उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति लाई जा रही है, जिसमें उद्योगों के लिए बिजली दरें कम रखने का प्रावधान होगा ताकि निवेश आकर्षित हो और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।


उन्होंने कहा कि हिमाचल तेजी से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेशभर में बायोचार प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि किन्नौर में जियोथर्मल ऊर्जा परियोजना शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है और हिमाचल इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएगा।


पंजाब से तीन साल का बिजली समझौता


मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली अधिशेष (Power Surplus) राज्य होने के नाते हिमाचल पंजाब को बिजली आपूर्ति के लिए तीन वर्षों का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) करेगा। उन्होंने पंजाब को हिमाचल का “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के रिश्तों को और मजबूत करेगा।


आईटी पार्क, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सोलन के कंडाघाट में आधुनिक आईटी पार्क विकसित कर रही है। साथ ही डेटा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर भी काम चल रहा है ताकि हिमाचल आईटी निवेश का नया केंद्र बन सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले औद्योगिक क्षेत्रों से राज्य को लगभग चार हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था, जो अब घटकर 150-200 करोड़ रुपये रह गया है। इसलिए प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक नीति में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं।


पर्यटन पूरी तरह सुरक्षित, अफवाहों से बचें


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं केवल हिमाचल तक सीमित नहीं हैं बल्कि देश के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि मानसून के दौरान भी हिमाचल यात्रा के लिए सुरक्षित है। हालांकि नदियों, खड्डों और नालों के किनारे जाने से बचना चाहिए।


चंडीगढ़ हिस्सेदारी, रेल और एयर कनेक्टिविटी पर जोर


मुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़ में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त करने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसमें भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत का 50 प्रतिशत राज्य सरकार वहन कर रही है। अगले तीन वर्षों में इसके पूरा होने की उम्मीद है।


उन्होंने कहा कि कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है और प्रदेशभर में हेलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं। भविष्य में सभी जिला मुख्यालयों को हेलीकॉप्टर सेवाओं से जोड़ने की योजना है।


आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में बड़ा विजन


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन और आईटी क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा जल्द ही हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी नई पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों के निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आर.एस. बाली, विधायक सुरेश कुमार एवं सुन्दर सिंह ठाकुर, हिमाचल पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, पूर्व विधायक सतपाल रायजादा, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल, टीआईई चंडीगढ़ के अध्यक्ष पुनीत वर्मा, टीआईई के पदाधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।