मुख्यमंत्री बोले-‘एक जिला तीन उत्पाद’ कार्यक्रम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा नया बल
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट (ODTP) कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी 12 जिलों से तीन-तीन उत्पादों का चयन किया गया है। इन 36 उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और विपणन को बढ़ावा देने के लिए अक्तूबर 2026 में एक मेगा प्रदर्शनी और रिवर्स बायर-सेलर मीट आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि चयनित उत्पादों का चयन उनकी आर्थिक क्षमता, बाजार में मांग और स्थानीय महत्व को ध्यान में रखकर किया गया है।
हर जिले के तीन विशिष्ट उत्पाद चुने गए
कार्यक्रम के तहत बिलासपुर से अदरक, रेशम उत्पादन और मत्स्य पालन, चंबा से चंबा चप्पल, सफेद मक्की और ऊन, हमीरपुर से हल्दी, बांस और मक्की, कांगड़ा से कांगड़ा चाय, कांगड़ा लघु चित्रकला और गिलोय, किन्नौर से चुल्ली तेल, किन्नौरी शॉल और चिलगोजा, कुल्लू से ट्राउट, हेम्प ऑयल और कुल्लू टोपी, लाहौल-स्पीति से सी-बकथॉर्न, पुल्ले और हरी मटर, मंडी से सेपू बड़ी, धातु शिल्प तथा पत्थर एवं लकड़ी की नक्काशी, शिमला से सेब आधारित उत्पाद, स्थानीय शहद, जौ का माल्ट एवं आटा तथा गुच्छी मशरूम, सिरमौर से लहसुन, अदरक और सिरमौरी लोइया, सोलन से मशरूम, टमाटर और फार्मास्यूटिकल उत्पाद तथा ऊना से आलू, लीची और ड्रैगन फ्रूट का चयन किया गया है।
अक्तूबर में होगा मेगा आयोजन
सरकार ने बताया कि अब तक तीन विक्रेता विकास कार्यक्रम और पांच रोजगार विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अगले चरण में अक्तूबर 2026 में चयनित उत्पादों की विशाल प्रदर्शनी के साथ रिवर्स बायर-सेलर मीट आयोजित होगी, जिसमें उत्पादकों, निर्यातकों, निवेशकों, खुदरा विक्रेताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार और नए व्यापारिक साझेदार मिलने की उम्मीद है।
नई औद्योगिक नीति में मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आगामी औद्योगिक नीति में ODTP से जुड़े उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज दिया जाएगा। इसमें भूमि पर रियायत, स्टांप शुल्क में छूट, रियायती बिजली, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति और प्राथमिकता क्षेत्र का दर्जा जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
ई-कॉमर्स और ब्रांडिंग पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि चयनित उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन पर विशेष जोर दिया जाएगा। उत्पादकों को प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और बायर-सेलर मीट में भागीदारी के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘एक जिला तीन उत्पाद’ कार्यक्रम हिमाचल की पारंपरिक विरासत और स्थानीय कौशल को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार सृजन और राज्य के समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।












