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एचपीयू के बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर में 31 प्रतिभागियों ने सीखे उद्यमिता के गुर

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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन, एफपीओ और इच्छुक उद्यमियों को वित्त, विपणन, कानूनी प्रावधानों व संस्थागत सहयोग की दी जानकारी


शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) स्थित बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर (बीआईसी-एचपीयू) में आयोजित तीन दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) का बुधवार को सफल समापन हो गया। 27 से 29 जुलाई तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और इच्छुक उद्यमियों सहित 31 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता, विपणन, कानूनी अनुपालन और संस्थागत सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।


कार्यक्रम के दौरान बीआईसी-एचपीयू के प्रभारी डॉ. रवि कांत भाटिया ने उद्यम शुरू करने की प्रक्रिया, बाजार विश्लेषण, लागत निर्धारण और वित्तीय संसाधनों पर मार्गदर्शन दिया। वहीं, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू) की सहायक प्राध्यापक डॉ. ईशा शर्मा भागरा ने उद्यम पंजीकरण, जीएसटी, पैन-टैन, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी साझा की।

एचपीयू के फॉरेंसिक साइंस विभाग के डॉ. प्रदीप कुमार ने एफएसएसएआई नियमों पर प्रशिक्षण दिया।


दूसरे दिन एनआरएलएम की जिला कार्यक्रम प्रबंधक रुचि ठाकुर ने स्वयं सहायता समूहों की योजनाओं की जानकारी दी, जबकि एचपीयू बिजनेस स्कूल के डॉ. विनोद नेगी ने ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया और ओएनडीसी जैसे प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग पर सत्र लिया। आईसीडीईओएल के डॉ. अशोक कुमार बंसल ने बैंक ऋण, परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और निवेशकों के समक्ष प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया समझाई। एसबीआई की सहायक प्रबंधक वैशाली चौहान ने कृषि बैंकिंग और सरकारी ऋण योजनाओं की जानकारी दी।


अंतिम दिन एचपीएनएलयू की एसोसिएट डीन डॉ. दीपिका गौतम ने वित्तीय साक्षरता और उद्यम प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। प्रतिभागियों ने बीआईसी-एचपीयू का भ्रमण भी किया, जबकि एमवीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर के केंद्रीय कार्यालय सचिव गोपाल आर्य ने पर्यावरण संरक्षण पर सत्र लिया।


समापन समारोह में एचपीयू के कुलपति प्रो. (सेवानिवृत्त) अरविंद कुमार भट्ट और बीआईसी-एचपीयू के प्रभारी डॉ. रवि कांत भाटिया ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि उद्यमिता केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त आधार है।

उन्होंने प्रतिभागियों से वैधानिक अनुपालन, वित्तीय अनुशासन और बाजार से बेहतर जुड़ाव के साथ अपने उद्यम विकसित करने का आह्वान किया।