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राजीव गांधी कॉलेज कोटशेरा में भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुरमयी संध्या, विद्यार्थियों ने जाना रियाज और रागों का महत्व

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जयपुर-अतरौली घराने की विदुषी सुनीता टिकारे ने दी व्याख्यान-सह-प्रस्तुति, राग गुणकली और अल्हैया बिलावल से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध


शिमला। राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, कोटशेरा (चौड़ा मैदान) के संगीत विभाग द्वारा सोमवार को भारतीय शास्त्रीय संगीत पर आधारित व्याख्यान-सह-प्रस्तुति (लेक्चर-कम-डिमॉन्स्ट्रेशन) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, रागों की संरचना और संगीत साधना के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गोपाल चौहान रहे। वहीं, हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. परवीन जरेट और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के योग विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. रीता भल्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।


कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तोता जयपुर-अतरौली घराने की प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका सुनीता टिकारे ने अपने व्याख्यान में रियाज, गुरु-शिष्य परंपरा, रागों की संरचना, स्वर-साधना तथा संगीत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के साथ संगीत साधना करने का आह्वान किया।


व्याख्यान के बाद सुनीता टिकारे ने राग गुणकली और अल्हैया बिलावल की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने दादरा, भजन, मराठी अभंग (विठ्ठल भजन) और मशहूर ग़ज़ल “आज जाने की ज़िद न करो” भी प्रस्तुत की, जिसे विद्यार्थियों और शिक्षकों ने खूब सराहा। प्रस्तुति में डॉ. मनोज ठाकुर ने हारमोनियम और राजेश ब्रह्मभट्ट ने तबले पर संगत की।


प्राचार्य डॉ. गोपाल चौहान ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ उनके व्यावहारिक ज्ञान, कलात्मक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना को भी समृद्ध करते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के अकादमिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया।


कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का परिचय डॉ. हेमराज चंदेल ने कराया, जबकि अंत में डॉ. कामिनी शांडिल ने सभी अतिथियों, कलाकारों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में शोध एवं विकास प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. अनुप्रिया शर्मा, महाविद्यालय के शिक्षक, गैर-शैक्षणिक कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


Kotshera College Classical Music Lecture