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जुन्गा में फिंगर प्रिंट विज्ञान पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू, अब मिनटों में होगी अंतरराज्यीय अपराधियों की पहचान

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NAFIS सिस्टम पर पुलिस और फॉरेंसिक अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण, फिंगर प्रिंट डेटाबेस की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर


शिमला। प्रदेश में अपराधियों की वैज्ञानिक पहचान और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, जुन्गा में सोमवार से फिंगर प्रिंट विज्ञान और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला का शुभारंभ फॉरेंसिक सेवाओं की निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन ने किया।


कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से 14 पुलिस फिंगर प्रिंट एनरोलमेंट यूजर्स और राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के तीन विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के लिए जतिन कुमार शर्मा, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से अतिथि प्रशिक्षक के रूप में शामिल हुए हैं।


डॉ. मीनाक्षी महाजन ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य जिला स्तर पर कार्यरत अधिकारियों को NAFIS से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी देना है, ताकि फिंगर प्रिंट अपलोडिंग, मिलान और पहचान की प्रक्रिया को और अधिक सटीक व प्रभावी बनाया जा सके।


उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते अपराधों के बीच फिंगर प्रिंट साक्ष्य का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पुलिस द्वारा घटनास्थल से एकत्र किए गए फिंगर प्रिंट NAFIS पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं, जिन्हें जुन्गा स्थित राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो के माध्यम से राष्ट्रीय डेटाबेस से मिलान किया जाता है।


प्रशिक्षक जतिन कुमार शर्मा ने बताया कि यदि किसी अपराधी का रिकॉर्ड पहले से राष्ट्रीय NAFIS डेटाबेस में उपलब्ध है, तो उसकी पहचान कुछ ही मिनटों में संभव हो जाती है। उन्होंने कहा कि अब यह प्रणाली राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के केंद्रीय डेटाबेस से पूरी तरह एकीकृत हो चुकी है, जिससे अंतरराज्यीय अपराधियों की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आसान हो गई है।


डॉ. मीनाक्षी महाजन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एनरोलमेंट यूजर्स के लिए यह अपनी तरह की पहली कार्यशाला है। इससे फिंगर प्रिंट डेटाबेस की गुणवत्ता में सुधार होगा, अपराधियों की पहचान दर बढ़ेगी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामलों की जांच अधिक तेजी और दक्षता के साथ पूरी की जा सकेगी।