कोलकाता में नव निर्वाचित विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम में बोले हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष; विधायी प्रक्रिया और संसदीय परंपराओं पर किया मार्गदर्शन
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि आजादी के बाद अब तक संसद में केवल 14 प्राइवेट मेंबर बिल ही राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त कर कानून बन सके हैं। वर्ष 1970 के बाद कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल संसद के दोनों सदनों से पारित नहीं हुआ, जबकि 17वीं लोकसभा में ऐसे 729 बिल पेश किए गए, जिनमें से केवल दो पर ही चर्चा हो सकी।
पठानिया पश्चिम बंगाल विधानसभा और लोकसभा सचिवालय के संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) द्वारा कोलकाता में 3 और 4 जुलाई को आयोजित नव निर्वाचित विधायकों के दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्राइवेट मेंबर बिल केवल कानून बनने तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका वास्तविक महत्व नए विचारों को सामने लाने, जनहित के मुद्दों पर बहस शुरू करने, जनमत तैयार करने और सरकार को नई नीतियां व कानून बनाने के लिए प्रेरित करने में होता है। कई महत्वपूर्ण सुधारों की शुरुआत भी प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में हुई, जिन्हें बाद में सरकारी विधेयकों में शामिल किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायी प्रक्रिया केवल औपचारिक नियमों का पालन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को कानूनी स्वरूप देने का संवैधानिक माध्यम है। नीति निर्माण, विधेयक का प्रारूप, बहस, समिति की समीक्षा, संशोधन और अंतिम मंजूरी जैसे प्रत्येक चरण कानून की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने नव निर्वाचित विधायकों से आग्रह किया कि वे संवैधानिक मूल्यों, जनहित और जिम्मेदारी की भावना के साथ विधायी कार्य करें। उन्होंने कहा कि किसी विधायक की पहचान उसके कार्यकाल या भाषणों से नहीं, बल्कि उसके द्वारा दिए गए गुणवत्तापूर्ण विधायी योगदान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में निभाई गई भूमिका से होती है।
कार्यक्रम के दौरान लोकसभा सदस्य एन.के. प्रेमचंद्रन और राज्यसभा सचिवालय के पूर्व संयुक्त सचिव प्रदीप चतुर्वेदी ने भी विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
प्रबोधन कार्यक्रम के बाद समिति प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति की बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें प्रारूप प्रतिवेदन को अंतिम रूप देकर अनुमोदित किया गया। बाद में समिति ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को प्रतिवेदन की हस्ताक्षरित प्रति सौंपते हुए समिति के कार्य से अवगत कराया।












