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भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए PWD अपनाए तकनीक आधारित कार्यप्रणाली: मुख्यमंत्री

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शिमला,

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तकनीक आधारित और आधुनिक कार्य प्रणाली अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए विभाग को पारंपरिक कार्यशैली से आगे बढ़कर नई तकनीकों और उन्नत निर्माण प्रणालियों को अपनाना होगा।

मुख्यमंत्री शिमला में ‘लोक निर्माण विभागों में गुणवत्ता आश्वासन’ विषय पर आयोजित उत्तर क्षेत्रीय अंतर-राज्यीय संवाद सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे। इस सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारी एवं अभियंता शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल ने कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिनमें लोक निर्माण विभाग ने सराहनीय कार्य किया। उन्होंने कहा कि राज्य का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पर्वतीय है, इसलिए बेहतर सड़क संपर्क लोगों की मूलभूत आवश्यकता है। ऐसे में विभाग को अब सुरंग निर्माण, बहुमंजिला भवनों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण जैसी उन्नत तकनीकों की ओर बढ़ना होगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा आपदा के बाद पुनर्निर्माण पर खर्च हो रहा है, जो वर्ष 2050 तक बढ़कर 14 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसलिए विभाग की क्षमता बढ़ाना और आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की मांग है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में सरकार लोक निर्माण विभाग के कार्यक्षेत्र का विस्तार करने पर भी विचार कर रही है, ताकि विभाग बांध निर्माण जैसे बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘क्वालिटी कंट्रोल फॉर रोड वर्क्स’ पुस्तक का भी विमोचन किया।

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश में लगभग 45 हजार किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क है और अधिकांश पंचायतें सड़क सुविधा से जुड़ चुकी हैं। ऐसे में इस विशाल नेटवर्क का रखरखाव बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सड़कों की गुणवत्ता और आयु बढ़ाने के लिए नई ड्रेनेज पॉलिसी तैयार की है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे विकास परियोजनाओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है। सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति पर कार्य कर रही है।

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