कूड़ेदान और जागरूकता बोर्ड लगाकर दिया स्वच्छ पर्यटन का संदेश
रकछम (किन्नौर): पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच किन्नौर की खूबसूरत बस्पा घाटी के रकछम गांव में पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरक पहल सामने आई है। रकछम माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर क्लब ने वन्यप्राणी मंडल सराहन और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गांव के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए कूड़ेदान स्थापित किए हैं और विभिन्न स्थानों पर जागरूकता बोर्ड लगाए हैं। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान का खर्च क्लब ने स्वयं वहन किया है।
रकछम गांव रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य से सटा हुआ है और हर वर्ष यहां हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन बढ़ने के साथ प्लास्टिक और अन्य कचरे की समस्या भी लगातार गंभीर होती जा रही है। इसी चुनौती को देखते हुए क्लब ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी अपने स्तर पर उठाई।
गांव के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए जागरूकता बोर्डों के माध्यम से पर्यटकों से अपील की गई है कि वे प्लास्टिक और अन्य कचरा खुले में न फेंकें, बल्कि निर्धारित कूड़ेदानों का उपयोग करें या अपना कचरा अपने साथ वापस ले जाएं। क्लब का मानना है कि प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों की साझी भागीदारी जरूरी है।
क्लब के अध्यक्ष नरेंद्र नेगी ने कहा कि बस्पा घाटी का पारिस्थितिकी तंत्र ही क्षेत्र की सबसे बड़ी पूंजी है। इसे सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक और पर्यटक की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी आगंतुकों से स्वच्छ पर्यटन को अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।
वन विभाग के रकछम ब्लॉक के वन खंड अधिकारी संतोष ठाकुर ने क्लब के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यदि युवा इसी तरह आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं तो हिमाचल के जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में बड़ी सफलता मिल सकती है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे अभियान चलाने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
अभियान में क्लब के सदस्य मोहित नेगी, तेनजिंग नेगी, तेनजिन दुंदुप, कल्पा नेगी, हरदेव नेगी, दिवाकर नेगी, मुकेश नेगी, बंटी, जगदीश नेगी, प्रदुमन नेगी, अभिषेक नेगी, प्रमोद, रजनीश और संजय सहित कई युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
क्लब को उम्मीद है कि यह पहल केवल रकछम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसपास के गांवों और पर्यटक स्थलों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल बनेगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ऐसे जनसहभागिता वाले अभियान लगातार चलते रहे तो किन्नौर की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।












