स्वरोजगार, वित्तीय समावेशन और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए किया प्रेरित
शिमला/चौपाल। जिला शिमला के चौपाल स्थित बीडीओ कार्यालय में मंगलवार को रैम्प (RAMP) परियोजना के सोशल इन्क्लूजन इंटरवेंशन के अंतर्गत महिला उद्यमियों के लिए “फंडिंग एवं नेटवर्किंग मीट तथा उद्यमिता विकास कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने, वित्तीय संसाधनों तक उनकी पहुंच मजबूत करने और स्वरोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में क्षेत्र की विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (SHGs), एनआरएलएम से जुड़े समूहों तथा महिला उद्यमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यशाला में करीब 85 प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर उद्यमिता, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में विस्तार अधिकारी (EO) चौपाल प्रताप सिंह शर्मा, अनूप सिंह, शाखा प्रबंधक यूको बैंक चौपाल, आरसीटी से नरेश जसवाल तथा महिला उद्यमियों में मधु और रितिका विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सोशल इन्क्लूजन टीम की ओर से कृतिका शर्मा एवं शिखा कंवर ने प्रतिभागियों को महिला उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं, वित्तीय समावेशन, बैंकिंग सुविधाओं और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज के दौर में महिलाएं स्वरोजगार और लघु उद्योगों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं और सरकार भी इसके लिए कई योजनाओं के जरिए सहयोग प्रदान कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने महिला उद्यमियों को ऋण सुविधा, स्टार्टअप फंडिंग, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता और व्यवसाय विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही नेटवर्किंग के महत्व को भी रेखांकित किया गया, ताकि महिलाएं अपने व्यवसाय को मजबूत बनाने के लिए एक-दूसरे के अनुभवों और सहयोग का लाभ उठा सकें।
मुख्य अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं उपलब्ध सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग का सही तरीके से लाभ उठाएं, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं बल्कि समाज और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकती हैं।
कार्यक्रम के अंत में एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने महिला उद्यमिता से जुड़ी चुनौतियों, वित्तीय बाधाओं और बाजार तक पहुंच जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान और संभावित अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा सकें।













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