मेयर सुरेंद्र चौहान बोले- निर्माण स्थल पर पहले ही जारी किया था स्टॉप वर्क नोटिस, मानसून में कटिंग और निर्माण करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
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शिमला। राजधानी शिमला के संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल क्षेत्र में हुए भूस्खलन के बाद नगर निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शनिवार को शिमला नगर निगम के मेयर सुरेंद्र चौहान ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। निरीक्षण के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में किसी भी परिवार को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मेयर ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के कारण पिछले दो-तीन दिनों से पहाड़ी धीरे-धीरे खिसक रही है, जिससे क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। भूस्खलन की चपेट में आसपास के दो से तीन मकान आए हैं। वहीं रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है तथा पानी की पाइपलाइन सहित अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित लोगों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सुरेंद्र चौहान ने कहा कि नगर निगम ने इस मामले में पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी थी। दो दिन पहले हुई एसयूसी (स्टैंडिंग अर्बन कमेटी) की बैठक में संबंधित निर्माण स्थल का मुद्दा उठाया गया था, जिसके बाद निर्माण कार्य पर तत्काल स्टॉप वर्क नोटिस जारी कर दिया गया। निर्माणकर्ता को सबसे पहले सुरक्षा दीवार (डंगा) बनाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माणकर्ता ने इसे लिखित रूप में स्वीकार किया है और नगर निगम ने भी सुरक्षा दीवार निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक संबंधित स्थल पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मेयर ने कहा कि बरसात के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की कटिंग और निर्माण गतिविधियां गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। इसे देखते हुए नगर निगम ने सभी सरकारी विभागों और निजी निर्माण एजेंसियों को मानसून के दौरान कटिंग और निर्माण कार्य नहीं करने के निर्देश जारी किए हैं। यदि कोई व्यक्ति या एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भवन का नक्शा रद्द करने जैसी कार्रवाई भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जल निकासी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि वर्षा का पानी सुरक्षित तरीके से निकल सके और मिट्टी के कटाव को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी का खिसकना और पेड़ों का गिरना कई बार प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है, लेकिन प्रशासन का प्रयास रहेगा कि संवेदनशील स्थानों की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं।
मेयर ने बताया कि नगर निगम ने पहले से ही शहर के संवेदनशील पेड़ों और भूस्खलन संभावित स्थानों की सूची तैयार कर रखी है। यदि बरसात के दौरान कहीं कोई पेड़ या ढांचा खतरनाक स्थिति में दिखाई देता है तो स्थानीय लोग सीधे एसडीएम कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। प्रशासन मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।












