शिमला में राजभवन तक निकाली रैली, बारिश के बीच दो घंटे धरना
जनगणना और परिसीमन से अलग कर इसी मानसून सत्र में कानून लागू करने की मांग
शिमला। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर सोमवार को महिलाओं के विभिन्न संगठनों ने शिमला, सिरमौर, कुल्लू और मंडी जिलों में प्रदर्शन किया। भारी बारिश के बावजूद महिलाओं ने रैलियां निकालीं और केंद्र सरकार से मौजूदा मानसून सत्र में ही विधेयक लागू करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने सभी जिलों में उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। शिमला में राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। इस दौरान महिला आरक्षण के समर्थन में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान के हस्ताक्षर भी संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए।
शिमला में जनवादी महिला समिति और यंग वूमेन क्रिश्चियन एसोसिएशन (YWCA) के नेतृत्व में महिलाओं ने राजभवन तक रैली निकाली। राजभवन पहुंचने के बाद प्रदर्शन किया गया और लगातार बारिश के बीच करीब दो घंटे तक धरना दिया गया।
धरने को संबोधित करते हुए जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष रंजना जरेट ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के बजाय तत्काल लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा इस कानून को लागू करने की नहीं दिखती और इसे अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है।
समिति की प्रदेश महासचिव फालमा चौहान ने कहा कि यदि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होता तो वर्तमान संसद में लगभग 123 महिला सांसद होतीं और विधानसभाओं में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी अधिक होता। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को समान राजनीतिक भागीदारी देने के लिए विधेयक को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।
जिला कार्यकारी अध्यक्ष रमा रावत, जिला सचिव सोनिया शुभरवाल, वाईडब्ल्यूसीए की रोहिणी, मीरा कुकरेजा तथा अन्य वक्ताओं ने भी केंद्र सरकार से मांग की कि महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से अलग कर इसी मानसून सत्र में लागू किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अब और इंतजार नहीं होना चाहिए तथा केंद्र सरकार को इस दिशा में तत्काल निर्णय लेना चाहिए।












