SPECT और सेल सेपरेटर; टांडा में छह हाई-एंड अल्ट्रासाउंड, नेरचौक में बनेगा PET स्कैन भवन
शिमला। गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार के लिए मरीजों को प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत कम करने की दिशा में हिमाचल सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा निवेश किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के लिए 83.85 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस राशि से आईजीएमसी शिमला, टांडा और नेरचौक सहित प्रदेश के कई प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक जांच एवं उपचार सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
सबसे बड़ा बदलाव आईजीएमसी शिमला में देखने को मिलेगा, जहां बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन और अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत करने के लिए नई मशीनें स्थापित की जाएंगी। आईजीएमसी में SPECT मशीन और सेल सेपरेटर की खरीद के लिए 8 करोड़ रुपये, जबकि 256-स्लाइस CT स्कैन मशीन के लिए 12 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट और जटिल जांच में बढ़ेगी क्षमता
SPECT मशीन के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों की कार्यप्रणाली का थ्री-डी आकलन किया जा सकेगा। यह हृदय, मस्तिष्क, हड्डियों, फेफड़ों और गुर्दों से संबंधित कई रोगों की जांच एवं मूल्यांकन में चिकित्सकों के लिए उपयोगी होगी।
वहीं, सेल सेपरेटर मशीन बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे डोनर या मरीज से पेरिफेरल ब्लड स्टेम सेल एकत्र करने, उन्हें प्रोसेस और काउंट करने तथा ट्रांसप्लांटेशन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
256-स्लाइस CT से जांच में आएगी तेजी
आईजीएमसी में स्थापित होने वाली 256-स्लाइस CT स्कैन मशीन संस्थान की डायग्नोस्टिक क्षमता को नई मजबूती देगी। इसके अलावा छह अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये तथा एनालॉग और डिजिटल सिस्टम से युक्त दो एक्स-रे मशीनों के लिए 3.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
इन सुविधाओं का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक तेज और प्रभावी बनाना है, ताकि मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े और चिकित्सकों को समय पर बेहतर डायग्नोस्टिक जानकारी उपलब्ध हो सके।
टांडा में भी छह हाई-एंड अल्ट्रासाउंड मशीनें
प्रदेश के दूसरे प्रमुख चिकित्सा संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा को भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य उपकरणों से लैस किया जाएगा। यहां छह हाई-एंड अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीद के लिए 6 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
वहीं, लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नेरचौक, मंडी में PET स्कैन भवन के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। PET स्कैन जैसी उन्नत जांच सुविधा उपलब्ध होने से कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के मूल्यांकन और उपचार की क्षमता को मजबूती मिलेगी।
अस्पतालों के साथ बुनियादी ढांचे पर भी फोकस
सरकार ने केवल चिकित्सा उपकरणों तक ही निवेश सीमित नहीं रखा है। सिविल अस्पताल ज्वालामुखी के लिए 17.95 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिसमें जल एवं विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था भी शामिल है।
सिविल अस्पताल जोगिंदर नगर में चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों के आवास निर्माण के लिए 4.90 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा महाविद्यालय जोलसप्पड़, हमीरपुर में पार्किंग सुविधा के लिए 12 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
जोलसप्पड़ में पुलिस स्टेशन एवं एसडीएएमओ कार्यालय के निर्माण के लिए भी 3.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा बिलासपुर जिले के घुमारवीं में अस्पताल सुविधाओं के विस्तार को भी मंजूरी दी गई है।
सरकार का लक्ष्य-हिमाचल में ही मिले बेहतर इलाज
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य लोगों को हिमाचल में ही गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि बेहतर उपचार के लिए मरीजों को राज्य से बाहर न जाना पड़े।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। नए चिकित्सा उपकरणों और आधारभूत सुविधाओं से प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों की क्षमता बढ़ेगी और गंभीर बीमारियों की जांच एवं उपचार के लिए मरीजों को प्रदेश के भीतर ही बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।











