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सड़क सुरक्षा और रखरखाव के लिए अहम संशोधन, डिजिटल मैपिंग से तेज होगी कार्रवाई: विक्रमादित्य सिंह

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गंभीर उल्लंघनों पर ही आपराधिक कार्रवाई, क्षतिग्रस्त सड़क-पुल की तत्काल मरम्मत कर दोषी से वसूला जाएगा खर्च


शिमला। हिमाचल प्रदेश में सड़कों की सुरक्षा, रखरखाव और प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने सड़क अवसंरचना संरक्षण कानून में अहम संशोधन किए हैं। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विधानसभा से पारित ‘हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026’ प्रदेश की सड़क व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।


उन्होंने कहा कि संशोधनों का मुख्य उद्देश्य कानून के प्रवर्तन को त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी बनाना है। आम जनता और विभागीय अधिकारियों के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं को भी सरल किया गया है।


डिजिटल मैपिंग से बार-बार सीमांकन की जरूरत नहीं


संशोधन में सड़क अवसंरचना के डिजिटल और जियो-कोऑर्डिनेटेड मानचित्र तैयार करने का प्रावधान किया गया है। एक बार सड़क की सीमा का सही तरीके से मैपिंग और जियो-कोऑर्डिनेशन हो जाने के बाद कार्रवाई के लिए बार-बार मौके पर भौतिक सीमांकन करने की जरूरत नहीं होगी। इससे प्रवर्तन प्रक्रिया तेज होगी और सड़क किनारे निर्माण से जुड़ी अनुमति तथा एनओसी जारी करने में भी समय कम लगेगा।


नुकसान पहुंचाने वाले से वसूला जाएगा मरम्मत खर्च


विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि संशोधित कानून के तहत विभाग को क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, जल निकासी संरचनाओं और अन्य सड़क अवसंरचना की तत्काल बहाली का अधिकार मिलेगा। जिस व्यक्ति की वजह से सड़क या अन्य ढांचे को नुकसान होगा, उससे मरम्मत का खर्च और जुर्माना वसूला जाएगा।


आपात स्थिति में, खासकर सड़क अवसंरचना या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा होने पर, विभाग तत्काल निवारक कार्रवाई भी कर सकेगा।


जरूरत पड़ने पर सड़क बंद करने का अधिकार


बेहतर रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए अब आवश्यकतानुसार किसी सड़क या उसके हिस्से को रखरखाव, मरम्मत अथवा सड़क अवसंरचना की सुरक्षा के लिए प्रतिबंधित या बंद किया जा सकेगा। इससे विभाग जरूरी काम सुरक्षित तरीके से पूरा कर सकेगा।


हर उल्लंघन पर आपराधिक केस नहीं


मंत्री ने कहा कि संशोधन के जरिए अपराध संबंधी प्रावधानों को भी तर्कसंगत बनाया गया है। अब हर उल्लंघन को आपराधिक अपराध नहीं माना जाएगा। केवल गंभीर या लगातार जारी रहने वाले उल्लंघनों में आपराधिक अभियोजन किया जाएगा।


इनमें अधिकारियों के काम में बाधा डालना, आदेश के बावजूद प्रतिबंधित गतिविधि जारी रखना, अंतिम मांग की राशि का जानबूझकर भुगतान न करना तथा सड़क पर लगाए गए प्रतिबंध या बंद करने के आदेश का उल्लंघन शामिल है।


आपत्ति और अपील की समयसीमा बढ़ी


जनता के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आपत्तियां और अपील दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाई गई है। साथ ही सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर स्तर पर अपीलीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इससे शिकायत और अपील की प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।


विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि संशोधनों का उद्देश्य सड़क अवसंरचना को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना, अनुमतियों की प्रक्रिया में तेजी लाना, समय पर रखरखाव एवं मरम्मत सुनिश्चित करना और प्रवर्तन व्यवस्था को निष्पक्ष एवं जनहितैषी बनाना है। राज्य सरकार प्रदेश में सड़क अवसंरचना की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।