महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी 6 से घटाकर 4 फीसदी
त्रिलोक जम्वाल और जयराम ठाकुर ने शुल्क बढ़ोतरी पर जताई आपत्ति
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के विरोध के बावजूद भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार ने महिलाओं को संपत्ति पंजीकरण में राहत देने को प्रमुख प्रावधान बताया, जबकि विपक्ष ने विभिन्न दस्तावेजी और राजस्व कार्यों के शुल्क में बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधेयक पर चर्चा के दौरान बताया कि कुल 65 अनुच्छेदों में से 49 में संशोधन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति के विक्रय एवं पंजीकरण पर स्टांप ड्यूटी को 6 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत किया गया है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं के नाम अधिक संपत्ति पंजीकृत हो और उन्हें संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिले।
मंत्री ने कहा कि कुछ मामलों में बाहरी लोगों द्वारा GPA के माध्यम से हिमाचल में संपत्ति संबंधी लेन-देन किए जाने और राजस्व व्यवस्था में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। संशोधनों के जरिए ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है।
वहीं, भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि महिलाओं को दी गई रियायत का वह विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन विधेयक में कई छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के शुल्क में बेतहाशा बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि एफिडेविट, अटॉर्नी, ड्राफ्टिंग और अन्य दस्तावेजों से जुड़े शुल्क कई गुना बढ़ने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इन प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने भी शुल्क बढ़ोतरी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश आर्थिक संकट से गुजर रहा है और ऐसे समय में आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से विधेयक को वापस लेने और शुल्कों पर दोबारा विचार कर इसे संशोधित रूप में सदन में लाने का आग्रह किया।
हालांकि, सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए विधेयक का समर्थन किया और विपक्ष के विरोध के बीच विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।











