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15 अगस्त को 4,967 निर्माण श्रमिकों को मिलेंगे 20.61 करोड़ रुपये, कल्याण बोर्ड ने जारी किया सहायता का खाका

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शिक्षा और विवाह सहायता पर सबसे अधिक जोर, हमीरपुर में सर्वाधिक 1,298 लाभार्थी; ई-केवाईसी से अपात्रों की पहचान का दावा


शिमला। हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड 15 अगस्त को प्रदेश के 4,967 पात्र निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 20.61 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित करेगा। बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर ने मंगलवार को शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बोर्ड का लक्ष्य अधिक से अधिक पात्र कामगारों को योजनाओं का लाभ पहुंचाना और पूरी भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है।


नरदेव कंवर ने बताया कि बोर्ड में अब तक 4,84,860 कामगार पंजीकृत हैं। प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को करीब 95 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है। बोर्ड ने आगामी वर्ष तक 300 करोड़ रुपये वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।


शिक्षा और विवाह सहायता पर सबसे ज्यादा खर्च


15 अगस्त को होने वाले वित्तीय सहायता वितरण में सबसे अधिक राशि विवाह और शिक्षा सहायता योजनाओं के तहत दी जाएगी। विवाह सहायता योजना के लिए 8.98 करोड़ रुपये और शिक्षा सहायता योजना के लिए 7.89 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।


इसके अलावा मृत्यु/अंतिम संस्कार सहायता के तहत 1.49 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 89.77 लाख रुपये, एकल, परित्यक्त और दिव्यांग महिलाओं की श्रेणी में 61 लाख रुपये तथा मातृत्व/पितृत्व सहायता योजना के तहत 38.02 लाख रुपये जारी किए जाएंगे।


शिक्षा सहायता योजना के तहत सबसे अधिक 2,788 लाभार्थियों को लाभ मिलेगा, जबकि विवाह सहायता योजना के तहत 1,758 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।


हमीरपुर में सबसे ज्यादा लाभार्थी


जिलावार आंकड़ों के अनुसार हमीरपुर में सबसे अधिक 1,298 लाभार्थियों को 5.43 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। कांगड़ा में 720 लाभार्थियों को 2.89 करोड़ रुपये, ऊना में 606 लाभार्थियों को 2.52 करोड़ रुपये और मंडी में 571 लाभार्थियों को 2.80 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा शिमला, सिरमौर, चंबा, बिलासपुर, कुल्लू, किन्नौर और सोलन जिलों के पात्र कामगारों को भी विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा।


ई-केवाईसी से अपात्र लाभार्थियों की पहचान का दावा


बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को लेकर नरदेव कंवर ने कहा कि पंजीकृत कामगारों की ई-केवाईसी करवाई गई है। इसके माध्यम से अपात्र लाभार्थियों की पहचान की गई है, ताकि सरकारी सहायता वास्तविक और पात्र निर्माण श्रमिकों तक ही पहुंचे।


उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2021-22 के दौरान करीब 70 हजार अपात्र कामगारों का पंजीकरण किया गया और महज नौ महीनों में उन्हें करीब 176 करोड़ रुपये वितरित किए गए। कंवर ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान बोर्ड ने ई-केवाईसी के माध्यम से व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं।


आरटीजीएस से सीधे खातों में पहुंचेगी सहायता


बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि अब वित्तीय सहायता आरटीजीएस के माध्यम से सीधे पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है। इससे भुगतान व्यवस्था में बिचौलियों की संभावना कम हुई है और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनी है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड की योजनाओं में निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, विवाह, स्वास्थ्य, मातृत्व एवं पितृत्व सहायता, आवास और अन्य सामाजिक सुरक्षा जरूरतों को शामिल किया गया है। बोर्ड का प्रयास है कि पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक देरी के मिले।


कंवर ने कहा कि बोर्ड का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता बांटना नहीं, बल्कि निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र तैयार करना है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र कामगारों तक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह तरीके से पहुंचाना बोर्ड की प्राथमिकता है।