आर्ट ऑफ लिविंग के विशेष आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार, सामूहिक ध्यान और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण
शिमला। श्रावण मास की पावन बेला में भगवान शिव की आराधना और रुद्र पूजा के आध्यात्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आर्ट ऑफ लिविंग के शिमला हिमाचल चैप्टर की ओर से कसुम्पटी स्थित राष्ट्रीय विद्या केंद्र स्कूल में विशेष रुद्र पूजा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।
आर्ट ऑफ लिविंग के बेंगलुरु आश्रम से स्वामी गुरुकृपानंद जी, वेद पंडित निशांत जी और अरुण जी विशेष रूप से शिमला पहुंचे और विधिवत रुद्र पूजा संपन्न करवाई। वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-विधि से कार्यक्रम स्थल का वातावरण शिवमय हो गया।
इस अवसर पर स्वामी गुरुकृपानंद जी और वेद पंडित निशांत जी ने श्रावण मास में रुद्र पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। साधना, ध्यान, मंत्र-जप और पूजा के माध्यम से व्यक्ति मानसिक शांति, सकारात्मकता और ऊर्जा का अनुभव कर सकता है।
उन्होंने कहा कि रुद्र पूजा केवल बाहरी अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यक्ति को अपने भीतर की अशांति, तनाव और नकारात्मक भावनाओं से ऊपर उठाकर आंतरिक शांति और चेतना से जोड़ना है। शिव शांति, चेतना, प्रेम और करुणा के व्यापक स्वरूप के प्रतीक हैं।
वक्ताओं ने परम पूज्य श्री श्री रविशंकर जी की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ध्यान, ज्ञान, सेवा, साधना और प्रसन्नता को जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सहज और संतुलित बना सकता है। आध्यात्मिकता दैनिक जीवन से अलग नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने का माध्यम है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और साधकों ने भाग लिया। सामूहिक साधना और प्रार्थना के दौरान श्रद्धालुओं ने नियमित ध्यान, साधना और सेवा के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा समाज में प्रेम और शांति का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।
रुद्र पूजा के बाद शिव भजन और कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके उपरांत सामूहिक ध्यान कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण, भजन, कीर्तन और ध्यान ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक पूर्णता प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी कांता जी और सावित्री जी ने पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्वामी गुरुकृपानंद जी, वेद पंडित निशांत जी और अरुण जी का विशेष धन्यवाद किया, जो बेंगलुरु आश्रम से शिमला पहुंचकर आयोजन में शामिल हुए। आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी स्वयंसेवकों, साधकों और श्रद्धालुओं का भी आभार जताया।
श्रावण मास का यह आयोजन धार्मिक अनुष्ठान के साथ सामूहिक साधना, शांति, सेवा और आत्मिक जागरण का अवसर बना तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन में ज्ञान, ध्यान, प्रेम और सेवा को अपनाने की प्रेरणा दी।











