100 फीसदी स्मार्ट क्लासरूम फंक्शनल; केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने की सराहना
शिमला। समग्र शिक्षा के तहत स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच समग्र शिक्षा के तहत मंजूर किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में हिमाचल की ओवरऑल पेंडेंसी शून्य प्रतिशत दर्ज की गई है। यानी इन पांच वर्षों में केंद्र से स्वीकृत एक भी इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य लंबित नहीं है। इस उपलब्धि पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी हिमाचल के प्रदर्शन की सराहना की है।
हर प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर घटक में जीरो पेंडेंसी
हिमाचल की उपलब्धि केवल कुल पेंडेंसी तक सीमित नहीं है। अतिरिक्त कक्षाओं, आर्ट एंड क्राफ्ट रूम, बाउंड्री वॉल, भवन निर्माण, कंप्यूटर रूम, जर्जर भवनों के सुधार एवं पुनर्निर्माण, पेयजल सुविधा और विद्युतीकरण समेत विभिन्न कार्यों में भी राज्य की पेंडेंसी शून्य प्रतिशत रही है।
इसी तरह बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और साइंस लैब, लाइब्रेरी रूम, मेजर रिपेयर, नए विद्यालयों के लिए स्वीकृत कार्य, रैंप एवं हैंडरेल तथा सोलर पैनल लगाने के कार्य भी निर्धारित समय में पूरे किए गए हैं। विद्यार्थियों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े बॉयज और गर्ल्स टॉयलेट के स्वीकृत कार्यों में भी कोई पेंडेंसी नहीं है।
कई बड़े राज्यों से बेहतर प्रदर्शन
केंद्रीय आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल के साथ गोवा और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों की पेंडेंसी शून्य प्रतिशत दर्ज हुई है। वहीं कई राज्यों में बड़ी संख्या में कार्य लंबित हैं। केरल में पेंडेंसी 75.57 प्रतिशत, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में 65.06 प्रतिशत तथा जम्मू-कश्मीर में 59.21 प्रतिशत दर्ज की गई है। ऐसे में हिमाचल का शून्य पेंडेंसी प्रदर्शन राज्य में स्वीकृत कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन को दर्शाता है।
डिजिटल शिक्षा में भी हिमाचल आगे
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी हिमाचल ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राज्य के 100 प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम फंक्शनल हैं। इसके मुकाबले केरल में करीब 50 प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम ही कार्यशील बताए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि हिमाचल में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने के साथ-साथ उनके प्रभावी संचालन पर भी जोर दिया जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में धरातल पर दिख रहा बदलाव
समग्र शिक्षा के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में जीरो पेंडेंसी और स्मार्ट क्लासरूम के 100 प्रतिशत फंक्शनल होने से यह संकेत मिलता है कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से किया जा रहा है। स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिए भवन, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, पेयजल, शौचालय और डिजिटल सुविधाओं पर समान रूप से काम किया गया है।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि स्वीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में शून्य पेंडेंसी और 100 प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम फंक्शनल होना हिमाचल के लिए गौरव की बात है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय समग्र शिक्षा की पूरी टीम, विशेषकर सिविल कोऑर्डिनेटर रंजना चौहान और उनकी टीम सहित अन्य कोऑर्डिनेटरों के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा का उद्देश्य केवल कार्यों को समय पर पूरा करना नहीं, बल्कि स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है।











