भाजपा ने कहा- पांच लाख रोजगार का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस, युवाओं से किया धोखा
शिमला। हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन रोजगार का मुद्दा सियासी संग्राम का केंद्र बन गया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा विधायकों ने बेरोजगारी और युवाओं को रोजगार देने के वादे को लेकर विधानसभा परिसर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए रोजगार संबंधी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए सदन का पूरा कामकाज स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई।
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले प्रदेश के युवाओं को पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन सरकार के कार्यकाल में अब तक कुछ हजार युवाओं को ही रोजगार मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ छल किया है। विपक्ष ने नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर रोजगार के मुद्दे पर सदन में व्यापक चर्चा की मांग की है।
प्रदर्शन पर सीएम का पलटवार, भाजपा की अंदरूनी कलह को बनाया निशाना
विपक्ष के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पलटवार करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का अधिकार और उसका दायित्व है, लेकिन भाजपा विधायक अपनी पार्टी की अंदरूनी कलह के कारण प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आंदोलन को युवाओं के मुद्दे से जोड़ने के बजाय भाजपा के भीतर चल रही खींचतान पर निशाना साधा।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता पार्टी हाईकमान की नजरों में बने रहने के लिए केवल दिखावे की राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर नेता प्रतिपक्ष को भी निशाने पर लेते हुए दावा किया कि भाजपा के कई विधायक अपने ही नेता प्रतिपक्ष को पद से हटाना चाहते हैं। सीएम के इस बयान ने विधानसभा परिसर में पहले से गरम माहौल को और सियासी रंग दे दिया।
सदन के भीतर भी टकराव के आसार
मानसून सत्र के पहले दिन ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच रोजगार के मुद्दे पर आमने-सामने की स्थिति बन गई है। विपक्ष जहां रोजगार को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, वहीं मुख्यमंत्री ने भाजपा के विरोध प्रदर्शन की धार को उसकी अंदरूनी राजनीति की ओर मोड़ दिया है। ऐसे में नियम 67 के तहत दिए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर भी सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं।
मानसून सत्र की शुरुआत रोजगार के मुद्दे पर हुई इस सियासी भिड़ंत से साफ है कि आने वाले दिनों में बेरोजगारी, सरकारी भर्तियां और कांग्रेस के चुनावी वादे विपक्ष के प्रमुख हथियार रहने वाले हैं। वहीं, सरकार भाजपा की एकजुटता और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाकर विपक्ष को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।











