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फीस बढ़ोतरी और नियुक्तियों के सवालों पर SFI का संघर्ष तेज

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CAG रिपोर्ट और 2019 शिक्षक भर्ती की न्यायिक जांच की मांग


शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में SFI हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के सचिव मुकेश कुमार ने 2020 से 2023 के बीच हुई 186 नियुक्तियों पर CAG की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों तथा वर्ष 2019 में हुई शिक्षक नियुक्तियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग उठाई।


मुकेश कुमार ने कहा कि CAG की रिपोर्ट संख्या-4, वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय से संबंधित अनुपालन ऑडिट के दौरान नियुक्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई हैं। SFI के अनुसार, रिपोर्ट में 186 नियुक्तियों से संबंधित प्रमाण-पत्रों, अनुभव प्रमाण-पत्रों और शोध प्रकाशनों के सत्यापन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्था की रिपोर्ट में सवाल उठने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करवानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि SFI किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रही है, बल्कि दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच और अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई चाहती है।


SFI सचिव ने वर्ष 2019 में विज्ञापन संख्या Rectt.-17/2019 के तहत हुई सहायक प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि RTI के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों के अध्ययन में प्रमाण-पत्रों की तिथियों, आवेदन की अंतिम तिथि के बाद प्रस्तुत दस्तावेजों, पात्रता, अनुभव की गणना और UGC Regulations, 2018 के पालन को लेकर कई प्रश्न सामने आए हैं। SFI ने इन मामलों की जांच सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से करवाने की मांग की।


मुकेश कुमार ने कहा कि RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उठाए गए सवाल अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं, बल्कि प्रथम दृष्टया सामने आए गंभीर प्रश्न हैं। इसलिए न्यायिक जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।


उन्होंने कहा, “आप कुलसचिव को बदल सकते हैं, अधिकारियों का तबादला कर सकते हैं, लेकिन RTI के माध्यम से हमारे पास मौजूद दस्तावेजों को नहीं बदल सकते।” उन्होंने कहा कि अधिकारियों के तबादले से नियुक्तियों से जुड़े सवाल खत्म नहीं होंगे और विश्वविद्यालय प्रशासन को SFI द्वारा सौंपे गए ज्ञापनों पर समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी।


पूरी फीस बढ़ोतरी वापस लेने की मांग


SFI ने विश्वविद्यालय की ओर से फीस में 10 प्रतिशत कटौती किए जाने को छात्रों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना। मुकेश कुमार ने कहा कि पहले छात्रों पर भारी फीस बढ़ोतरी का बोझ डाला गया और अब केवल 10 प्रतिशत कटौती को राहत के रूप में पेश किया जा रहा है। संगठन ने पूरी फीस बढ़ोतरी वापस लेने और विभिन्न मदों में फीस बढ़ाने का कारण तथा उसका पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।


उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति का बोझ विद्यार्थियों पर डालने के बजाय प्रशासन को अपने खर्चों और वित्तीय प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी चाहिए।


आंदोलन तेज करने की चेतावनी


SFI ने चेतावनी दी कि यदि फीस बढ़ोतरी पूरी तरह वापस नहीं ली गई और 186 नियुक्तियों से जुड़े CAG के सवालों तथा 2019 की शिक्षक नियुक्तियों की न्यायिक जांच नहीं करवाई गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मुकेश कुमार ने कहा कि छात्रों को लामबंद कर कुलपति कार्यालय का घेराव किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को हिमाचल प्रदेश विधानसभा तक ले जाकर विधानसभा घेराव किया जाएगा।


SFI ने मांग की कि CAG की आपत्तियों, RTI से सामने आए दस्तावेजों और शिक्षक नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तथा नियुक्तियों में UGC और विश्वविद्यालय के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।