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स्वास्थ्य सेवाओं पर विधानसभा में सुक्खू-जयराम आमने-सामने

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हिमकेयर घोटाले की जांच पूरी होने से पहले आरोप लगाना गलत : जयराम ठाकुर


मुख्यमंत्री बोले- भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए तो जेल जाएंगे, जांच से नहीं हटेंगे पीछे


विपक्ष के हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित



शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नियम-130 के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र पर चल रही चर्चा के दौरान हिमकेयर योजना और प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। चर्चा के दौरान विपक्ष के हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित करनी पड़ी।


चर्चा में कांग्रेस विधायक राम कुमार की ओर से पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में दून विधानसभा क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों को बंद किए जाने और हिमकेयर में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाए जाने पर जयराम ठाकुर ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि हिमकेयर मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, ऐसे में जांच पूरी होने से पहले इसे घोटाला कहना उचित नहीं है।


जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले हिमकेयर में 1100 करोड़ रुपये के घोटाले की बात करते थे और अब यह आंकड़ा 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है और अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को कानून के दायरे में रहकर काम करने की नसीहत देते हुए कहा कि यदि जांच को प्रभावित करने या जबरन कार्रवाई कराने की कोशिश हुई तो भविष्य में जांच की भी जांच होगी।


उन्होंने कहा कि कानून सबके सामने है और जरूरत पड़ी तो मामला अदालत में भी रखा जाएगा। जयराम ने टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी के उपकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां रोबोटिक सिस्टम मौजूद है, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि चार साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कब शुरू होगा।


नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल को लोग तालाबंदी के कार्यकाल के तौर पर याद करेंगे। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी के खिलाफ गड्ढा खोदने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए विपक्ष पर पलटवार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए भी कई लोगों ने खाइयां खोदी थीं, लेकिन ईश्वर की कृपा से वह मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई नई योजनाएं शुरू कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो अक्तूबर से प्रदेश में ‘अपना परिवार-सुखी परिवार’ योजना शुरू की जाएगी, जिससे करीब दो लाख परिवार लाभान्वित होंगे। योजना के तहत 300 यूनिट मुफ्त बिजली और महिलाओं को 1500 रुपये की सहायता देने की बात भी उन्होंने सदन में कही।


स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पिछले 40 वर्षों के दौरान पीजी की करीब 270 सीटें थीं, जबकि वर्तमान सरकार मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 320 सीटें बढ़ा रही है। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से 300 डॉक्टरों की भर्ती और मेडिकल कॉलेजों में नर्सों की भर्ती की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार भाजपा की ओर से दी गई चार्जशीट में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी और वह इससे डरने वाले नहीं हैं। हिमकेयर मामले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच पूरी होने दी जाए और यदि कोई घोटाले में दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।


उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अधिकारियों को धमकाने से बचने की भी अपील की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में पीछे हटने वाली नहीं है और जांच में दोषी पाए जाने वालों को सजा मिलेगी।


इसी बीच विपक्षी सदस्यों ने सदन में फिर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों को व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए, लेकिन हंगामा जारी रहा। स्थिति को देखते हुए अध्यक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित करते हुए इसे मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।