जयराम ठाकुर बोले- हर साल एक लाख नौकरियों का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस, अब कार्यकाल पूरा होने को फिर भी युवा रोजगार के लिए भटक रहे
बिक्रम ठाकुर ने आउटसोर्स भर्तियों की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान रोजगार और आउटसोर्स भर्तियों के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायकों ने सदन से बाहर आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के नाम पर कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन सरकार का कार्यकाल पूरा होने की ओर है और उन वादों को पूरा नहीं किया गया।
सदन से बाहर मीडिया से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर युवाओं के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले हर साल एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन करीब चार साल का कार्यकाल पूरा होने को है और प्रदेश के युवा आज भी रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
‘युवाओं का वोट लेकर सत्ता में आई कांग्रेस’
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने युवाओं को रोजगार देने का भरोसा देकर उनका समर्थन हासिल किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद रोजगार के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह विफल रही। उन्होंने कहा कि युवाओं से किए गए वादे पूरे करने के बजाय सरकार केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में विपक्ष ने रोजगार और आउटसोर्स भर्ती से जुड़े गंभीर सवाल उठाए थे, लेकिन उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। जयराम ठाकुर के मुताबिक, सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय बात को इधर-उधर किया गया और राजनीतिक बातें की गईं। यही वजह रही कि विपक्ष को सदन से बाहर आकर सरकार के खिलाफ विरोध जताना पड़ा।
आउटसोर्स कंपनियों के पंजीकरण पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में आउटसोर्स भर्तियों को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पदाधिकारियों के नाम पर दनादन आउटसोर्स कंपनियां रजिस्टर की जा रही हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन कंपनियों के माध्यम से होने वाली भर्तियों में पारदर्शिता और मेरिट सुनिश्चित करने की क्या व्यवस्था है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने सदन में 600 नौकरियां देने की बात कही थी, लेकिन सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि रोजगार के ये अवसर किस प्रक्रिया और किस आधार पर दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और उन्हें रोजगार देने के बजाय केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं।
बिक्रम ठाकुर ने पूछा- किस मेरिट के आधार पर मिल रही नौकरियां?
वहीं, पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने भी आउटसोर्स भर्तियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने सदन में प्रदेश में आउटसोर्स के माध्यम से हो रही भर्तियों को लेकर सवाल पूछा था, लेकिन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया।
बिक्रम ठाकुर ने सवाल उठाया कि आखिर आउटसोर्स के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में किस मेरिट और चयन प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि क्या इन नौकरियों के लिए किसी तरह का पैसा लिया जा रहा है।
‘विजिलेंस केवल विपक्ष की जांच करेगी या भर्तियों की भी?’
बिक्रम ठाकुर ने सरकार की जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि अगर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की बात करती है तो विजिलेंस केवल विपक्ष के नेताओं की जांच करेगी या फिर प्रदेश में हो रही आउटसोर्स भर्तियों की भी जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आउटसोर्स भर्ती से जुड़े आरोपों की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए, ताकि युवाओं के बीच किसी तरह का संदेह न रहे। बिक्रम ठाकुर ने इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की मांग की, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आ सके।
भाजपा नेताओं ने कहा कि रोजगार प्रदेश के युवाओं से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार को इस पर राजनीति करने के बजाय स्पष्ट नीति और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के साथ जवाब देना चाहिए।











