बोले-रैशनलाइजेशन के तहत लिया था फैसला, 100 फीसदी स्टाफ उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता; 300-350 पद भर्ती के लिए भेजे
शिमला। शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि संबंधित कॉलेज को कम छात्र संख्या के चलते रैशनलाइजेशन प्रक्रिया के तहत डी-नोटिफाई किया गया था। संबंधित कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम थी, जबकि प्रदेश के अन्य महाविद्यालयों में भी छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए गए थे। हालांकि, विधायक की मांग और सदन में मामला उठने के बाद कॉलेज को दोबारा नोटिफाई कर दिया गया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी विधानसभा क्षेत्र के साथ भेदभाव करना नहीं है। सरकार चाहती है कि प्रदेश में संचालित महाविद्यालयों में आवश्यकतानुसार 100 प्रतिशत स्टाफ उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इससे पहले सदन में डलहौजी के विधायक डीएस ठाकुर ने शून्यकाल में शिक्षा मंत्री से सवाल किया था कि कॉलेज को नोटिफाई न किए जाने से क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि दूरदराज के गांवों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए कॉलेज की सुविधा महत्वपूर्ण है और संस्थान को डी-नोटिफाई किए जाने से बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने शिक्षा व्यवस्था और क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षकों और अन्य रिक्त पदों को भरने के लिए करीब 300 से 350 पद भर्ती प्रक्रिया के लिए भेजे गए हैं। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिक्त पदों को भरने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।










